Wednesday, January 14, 2026
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नई सरेंडर नीति बनी Game-Changer

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नई सरेंडर नीति से काफी आशावान

राज्य में उग्रवाद को खत्म करने में मददगार हो सकती है नई सरेंडर नीति, भय के बजाय मिलेगा सम्मान

राज्य डेस्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नई सरेंडर नीति के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने माओवादियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा पर अंकुश लगाने और माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से नई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति 2025 लागू की गई है। इस नीति को न सिर्फ एक नीतिगत बदलाव माना जा रहा है, बल्कि यह माओवादी समस्या के समाधान में एक Game-Changer साबित हो सकती है। राज्य सरकार ने नई सरेंडर नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि अब हथियार छोड़ने वालों को डर नहीं, बल्कि सम्मान मिलेगा।

नई सरेंडर नीति से हथियारों पर मिलेगा मोटा इनाम
नई सरेंडर नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को हथियारों के प्रकार के अनुसार इनाम मिलेगा। सबसे ज्यादा इनाम लाइट मशीन गन (एलएमजी) पर मिलेगा — 5 लाख रुपये। एके-47 या त्रिची असॉल्ट राइफल पर 4 लाख, मोर्टार पर 2.5 लाख, इंसास राइफल पर 2 लाख, एमपी-9 टेक्टिकल या एक्स-95 पर 1.5 लाख, .303 राइफल पर 1 लाख, एक्स-कैलिबर पर 75,000, यूबीजीएल अटैचमेंट पर 40,000, 315/12 बोर बंदूक पर 30,000, और ग्लॉक पिस्टल पर भी 30,000 रुपये तक इनाम मिलेगा। हर आत्मसमर्पणकर्ता माओवादी को, चाहे उसके पास कोई हथियार हो या न हो, कम-से-कम 50,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

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नई सरेंडर नीति से विस्फोटक की जानकारी पर भी इनाम
नई सरेंडर नीति में कहा गया है कि यदि कोई आत्मसमर्पण करने वाला माओवादी संगठन के छिपे हुए विस्फोटक या हथियारों के ठिकानों की जानकारी देता है और उस जानकारी के आधार पर बरामदगी होती है, तो उसे 15,000 से 25,000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। यदि उसकी जानकारी से बड़े पैमाने पर हथियार डंप या विस्फोटक सामग्री मिलती है, तो 1 लाख रुपये तक का इनाम भी संभव है।

Game-Changer बनी नई सरेंडर नीति: साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई सरेंडर नीति के बारे में जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि माओवादियों को भयमुक्त वातावरण और सम्मानजनक जीवन दिया जाए। उन्होंने कहा, जो युवा भ्रम, दबाव या भय में आकर माओवादी बने, उनके पास अब लौटने का रास्ता है। साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ नई सरेंडर नीति का मकसद सिर्फ आत्मसमर्पण कराना नहीं है, बल्कि आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास और सशक्तिकरण भी सुनिश्चित करना है।

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विवाहित माओवादी जोड़ों को भी मिलेगा लाभ
नई सरेंडर नीति के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि पति-पत्नी दोनों माओवादी हैं और आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें एक इकाई मानते हुए एक लाख रुपये का विवाह अनुदान भी दिया जाएगा। इसके अलावा, भारत सरकार की पुनर्वास योजनाओं का भी लाभ इन्हें मिलेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि जो माओवादी इनामी सूची में शामिल हैं, उन्हें आत्मसमर्पण पर पूरी इनामी राशि नियमों के तहत दी जाए।

नई सरेंडर नीति का उद्देश्य सिर्फ पैसे देना नहीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई सरेंडर नीति का दायरा केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन को भी प्रमुखता दी गई है। सरकार चाहती है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी न केवल समाज में लौटें, बल्कि स्वाभिमान के साथ जीवन यापन करें।

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