-नासिक वेरायटी का बीज बिक रहा 24 सौ रुपये किग्रा के दर से
-बीघा में प्याज की बुवाई करने वाले किसान बिस्वा में आ गये
वाराणसी (हि.स.)। सेब से भी महंगा बिक रहे प्याज के दाम से लोग बेहाल हैं। अब बुवाई के सीजन में प्याज का उन्नत बीज किसानों को खून के आंसू रुलाने लगा है। उन्नत बीज के आसमान छूते दाम को देख बीघे में प्याज की बुवाई करने वाले किसान बिस्वा में प्याज के बीज बो रहे हैं।
नवम्बर माह में प्याज के बुवाई के दौर में नासिक वेराइटी के गौरान पूसा रेड बीज की मांग वाराणसी सहित पूर्वांचल के किसानों में बनी हुई है। यह वेराइटी 2400 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है।
जगतगंज स्थित किसान बीज घर के संचालक राजन राय ने सोमवार को ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में बताया कि नासिक वेराइटी के गौरान पूसा रेड प्याज के बीज की मांग पूर्वांचल में अधिक है। हल्के भूरे रंग के इस प्याज की पैदावार 20 से 25 कुंतल प्रति बीघे है। लगभग तीन किलो बीज से एक बीघे खेत में प्याज की बुवाई होती है। सबसे महंगे बीज से तैयार होने वाली प्याज की उपज बेहद टिकाऊ होती है। लगभग साल भर तक ये प्याज खराब नहीं होती। इसलिए किसान इसे पसंद करते हैं। इसकी बिक्री भी अधिक होती है।
उन्होंने बताया कि बीज के महंगा होने के चलते किसान अब बीघे की बजाय बिस्वा में प्याज के बीज बो रहे है। उन्होंने बताया कि नासिक वेराइटी की ही एन—53 बीज भी मांग में है। यह बीज 1400 रुपये किग्रा की दर से बिक रही है। लाल रंग की यह प्याज लगभग चार माह तक टिकाऊ होती है। खाने में तीखा और लज्जतदार प्याज लोगों की पसंद है। पूर्वांचल में इस बीज की मांग 60 फीसद है। एन—53 बीज भी तीन किलो प्रति बीघा में बोई जाती है। इसकी उपज 35 से 40 कुंतल प्रति बीघा है। इसी तरह दिव्या वेराइटी का बीज 600 रुपये किग्रा में उपलब्ध है। फुरसुंगी वेराइटी की प्याज बीज भी लोगों की पसंद हैं। सफेद रंग की ये प्याज भी प्रति बीघा तीन किलो बोई जाती है। अन्य बीजों में पूसा रेड, पूसा रतनार, पूसा माधवी, अर्का लालिमा, एग्रीफाउंड लाइट रेड, उदयपुर-101, उदयपुर-103, अर्का पिताम्बार, फुले स्वर्णा, अर्ली ग्रेनो, ब्राउन स्पेनिच, पूसा व्हाइट राउंड है।
उन्होंने बताया कि पूर्वांचल में सबसे अधिक प्याज का उत्पादन सोनभद्र और मिर्जापुर जिले में होता है। इसके बुवाई का समय अक्टूबर अन्तिम सप्ताह से मध्य नवंबर तक करना अच्छा रहता है। लेकिन, दिसम्बर के प्रथम सप्ताह तक भी किसान इसकी बुवाई करते है। आमतौर पर प्याज की फसल 90 दिन में तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि अच्छी उपज के लिए प्याज के पौधे के लिये क्यारी ऐसे स्थान पर बनानी चाहिए, जहां पर सिचाई और पानी के निकास का अच्छा प्रबंध हो। आसपास छाया वाले वृक्ष नहीं होने चाहिए।
पौधे तैयार करने के लिए तीन मीटर लंबी तथा एक मीटर चौड़ी क्यारी भूमि से लगभग 15-20 सेमी ऊंची पहले बना लेनी चाहिए। बुआई के बाद बीज को मिट्टी तथा गोबर के खाद के मिश्रण से ढ़ककर उसके ऊपर धान के पुआल की एक पतली परत बिछा देना चाहिए जिससे तेज धूप तथा वर्षा से बीज की रक्षा हो सके।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में प्याज बोने वाले किसानों को बीज नि:शुल्क शासन उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए किसानों को काफी पापड़ बेलना पड़ता है। इसमें समय भी लगता है इसलिए ज्यादातर किसान बाजार से ही बीज खरीदते है। उन्होंने बताया कि भारत प्याज उत्पादन में चीन के बाद दूसरे और क्षेत्रफल में पहले स्थान पर है। लेकिन, अन्य उत्पादक देशों जैसे चीन, अमेरीका, नीदरलैंड आदि की तुलना में पैदावार काफी कम है।
