Wednesday, June 10, 2026
Homeउत्तर प्रदेशUP News: समलैंगिक शोषण का सनसनीखेज खुलासा

UP News: समलैंगिक शोषण का सनसनीखेज खुलासा

सात घंटे तक युवती ने नशा देकर महिला से किया समलैंगिक शोषण

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती करती थी ब्लैकमेल, पुलिस ने कराया मुक्त

प्रादेशिक डेस्क

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक समलैंगिक शोषण का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने पहले दोस्ती, फिर नशा देकर अप्राकृतिक संबंध और फिर अश्लील वीडियो के जरिये ब्लैकमेलिंग कर कई महीनों तक पीड़िता को प्रताड़ित किया। इस पूरी वारदात ने lesbian exploitation जैसे गंभीर अपराध की गहराई को उजागर कर दिया है।

होटल में बुलाकर दिया नशा, फिर बनाए संबंध और लीं अश्लील तस्वीरें
पीड़िता ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 2023 में उसकी मुलाकात सोशल मीडिया के माध्यम से रेखा नामक युवती से हुई थी। जल्द ही उनकी बातचीत दोस्ती में बदल गई। एक दिन रेखा ने उसे होटल में बुलाया और नशे की हालत में उसके साथ जबरन समलैंगिक शोषण बनाए। रेखा के साथ एक अन्य युवती भी मौजूद थी। दोनों ने मिलकर सात घंटे तक महिला को शारीरिक, मानसिक और यौन रूप से प्रताड़ित किया। न केवल अप्राकृतिक संबंध बनाए, बल्कि उसकी अश्लील वीडियो और फोटो भी रिकॉर्ड की गईं।

यह भी पढ़ें: मनीष कश्यप ने भाजपा को दिया झटका

अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर करती रही ब्लैकमेल
समलैंगिक शोषण पीड़िता का आरोप है कि रेखा लगातार उन फोटो-वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसे अपने जाल में फंसाए रखी। वह उसे बार-बार मिलकर संबंध बनाने के लिए मजबूर करती रही। अब जब पीड़िता ने प्रतिरोध किया, तो आरोपी रेखा ने धमकी दी कि वह ये सारी तस्वीरें और वीडियो उसके पति को भेज देगी। इस धमकी से परेशान होकर आखिरकार महिला ने पुलिस की शरण ली।

गुजरात में बंधक बनाकर बनाए गए संबंध
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब आरोपी रेखा ने 14 अगस्त 2024 को एक विशेष एड्रेस भेजकर पीड़िता को वहां बुलाया। पीड़िता अपने परिवार को बिना बताए वहां पहुंची, जहां से रेखा उसे गुजरात ले गई। गुजरात में एक किराए के कमरे में रेखा ने उसे बंधक बना लिया और कई दिनों तक समलैंगिक शोषण करती रही। वीडियो बनाना, प्रताड़ना देना और मानसिक दबाव डालना लगातार जारी रहा। जब पीड़िता के पति ने गाजियाबाद थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तब मौका पाकर पीड़िता ने परिजनों को किसी तरह जानकारी दी। पुलिस तत्काल गुजरात पहुंची और उसे रेखा के कब्जे से मुक्त कराया।

यह भी पढ़ें: देह व्यापार का भंडाफोड़! अवैध संबंधों के पीछे छिपा काला सच

महिला ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए
समलैंगिक शोषण पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर पुलिस ने उसकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अगर समय रहते पुलिस ने कार्रवाई की होती, तो वह इस लंबे शोषण से बच सकती थी। पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है। संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसीपी ने बयान में कहा कि विस्तृत विवेचना के बाद रेखा और उससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

‘समलैंगिक शोषण’ का व्यापक संकेत
इस घटना ने समलैंगिक शोषण जैसे गहरे सामाजिक और मानसिक मुद्दे को उजागर किया है। जहां एक ओर LGBTQIA+ समुदाय के अधिकारों को लेकर समाज जागरूक हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार के अपराध उनकी लड़ाई को भी नुकसान पहुंचाते हैं। यह स्पष्ट है कि अपराध, चाहे किसी भी लिंग, लैंगिक झुकाव या पहचान से जुड़ा हो, उसे कानून और सामाजिक दृष्टि से समान रूप से देखा जाना चाहिए।

पीड़िता की सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहयोग की मांग
मानवाधिकार संगठनों और महिला सहायता समूहों ने इस मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन से मांग की है कि पीड़िता को सुरक्षा दी जाए और उसे मानसिक, भावनात्मक सहयोग मिले ताकि वह इस सदमे से उबर सके।

यह भी पढ़ें: कोरोना संक्रमण : एक्टिव केस 6000 के पार, मौतों में उछाल

  • आभूषण बनती जंजीरें: अदृश्य बेड़ियों का सच

    आभूषण बनती जंजीरें: अदृश्य बेड़ियों का सच

    अतुल अद्वैत क्या समाज वाकई केवल चमकदार इमारतों और तकनीक से बदलता है या हमारे मन में चुपचाप बोए गए विचार उससे भी बड़ा बदलाव लाते हैं? जब कोई समाज अपनी यादें और सोचने का तरीका खोने लगता है तो सबसे पहले क्या मरता है- इतिहास, संस्कृति या खुद इंसान? जब एक थका-हारा मजदूर दिन…


  • किताबों से आगे: स्वतंत्र चिंतन की तलाश

    किताबों से आगे: स्वतंत्र चिंतन की तलाश

    अतुल अद्वैत क्या आप सचमुच खुद से सोच रहे हैं या केवल अपनी मोबाइल स्क्रीन पर दूसरों के विचारों को स्क्रॉल कर रहे हैं? क्या हज़ारों पुस्तकें पढ़ लेने के बाद कोई महान विचारक बन सकता है? आज के डिजिटल युग में, जहाँ हर समय नई जानकारी हमारी आँखों के सामने चमकती है, कहीं हमने…


  • अभिव्यक्ति का शोर या विचार का मौन

    अभिव्यक्ति का शोर या विचार का मौन

    अतुल अद्वैत भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है लेकिन क्या यह स्वतंत्रता अपने आप में पूर्ण है? क्या कोई व्यक्ति वैचारिक रूप से परतंत्र होते हुए भी अभिव्यक्ति के स्तर पर स्वतंत्रता का दावा कर सकता है? आज, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अपने चरम पर दिखाई देती है, तब यह…


RELATED ARTICLES

Most Popular