लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में राजभवन प्रांगण स्थित छोटा लॉन में अनुपम मिशन मोगरी, गुजरात के सौजन्य से ज्ञान चर्चा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सेवा-भाव से नये भारत का निर्माण करें। महापुरुषों के दर्शन कर उनके द्वारा दी गयी सीख को आत्मसात करते हुए संकल्प करें कि हम अपने समाज को एक आदर्श समाज बनाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वयं से संकल्प करें कि मैं अच्छा क्या कर सकता हूँ, कैसे कर सकता हूं, इससे मुझे तथा देश को क्या फायदा होगा। जब हमारे युवा ऐसा सोचेंगे तो देश आगे बढ़ेगा, आपसी वार्तालाप, विचार विमर्श से नए -नए विचार, नया ज्ञान तथा नयी सोच विकसित होती है सही दिशा एवं मार्ग दर्शन देने का कार्य हमारे संत महापुरुष देते हैं।
राज्यपाल ने बताया कि स्वामी नारायण भगवान का प्राकट्य उत्तर प्रदेश में हुआ था। राज्यपाल ने कहा कि हमें युवाओं को बताना होगा कि वे सोचें कि हमारा देश कैसा है, उसे कैसे और अच्छा बनाया जा सकता है, इसके लिए किस प्रकार समर्पित होकर कार्य करना है।
परम पूज्य साहेब महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सुख, दुःख जीवन के विकल्प हैं । ये आते-जाते रहते हैं। भगवान एवं संत पुरुष व साधु संतों की संगति से हमारी आत्मा शुद्ध होती है। इससे हमारे जीवन में आनंद आता है।
कहा कि तीर्थयात्रा, पदयात्रा, ऋषियों के सानिध्य तथा संत सानिध्य ऐसे मंत्र हैं जिनसे हम सन्मार्ग की ओर आगे बढ़ते हैं। इसलिए हम सत्कर्म करें। अपने अच्छे कर्म से अपना हृदय परिवर्तन कर दीन, दुखियों, असहायों, जरूरतमंदों की मदद करें तथा भटके हुए लोगों को सही मार्ग पर लाने के लिए प्रयास करें।
कहा कि आपके हृदय में भक्ति होनी चाहिए। कलयुग में आत्मा के कल्याण के लिए भक्ति मार्ग सर्वोत्तम है। अतः भक्तिमय बनें, प्रभु के प्रति आस्था रखें उनके दिये मंत्रों का जाप करें आपका जीवन धन्य हो जाएगा।
संत गुरु साहिब दास ने कहा कि देह चला जाता है और परम तत्व यही रह जाता है तथा दिव्य संत की सत्संगति से मानव दिव्य हो जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान का सम्बध प्रत्येक व्यक्ति के रोम-रोम में होता है। इसलिए सभी को प्यार से आशीर्वाद दें, ऐसा करने से आपकी आत्मा भी भगवान की हो जाएगी। अपनी संकल्प शक्ति को मजबूत कीजिये। जब दिव्य दर्शन होता है तो हमारी आस्था में प्रकाश होता है।
कार्यक्रम में शान्ति दादा, डॉ. जीतू, शंकर भाई पटेल, विजय भाई ठक्कर, सुरेन्द्र भाई, बिन्दु बा, वर्षा जी सहित राजभवन के समस्त अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।
बृजनन्दन
