Friday, April 17, 2026
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सरसों की खेती : थोड़ी सी रखें सावधानी, होगा मुनाफा

– कृषि वैज्ञानिक की सलाह

गोरखपुर (हि.स.)। किसानों को सरसों की खेती मालामाल कर सकती है। वैज्ञानिक खेती करें और उन्नतशील बीजों का प्रयोग करें। इसमें खेती का समय, उर्वरकों का प्रयोग और सिंचाई भी महत्वपूर्ण पक्ष है। उत्तर प्रदेश के आलावा राजस्थान, पंजाब, हरियाणा राज्यों में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, बावजूद इसके यूपी के किसान इसका भरपूर लाभ ले सकते हैं। बस, थोड़ी से सावधानी रखने की जरूरत है।

कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर आदित्य प्रकाश द्विवेदी कहते हैं कि ठंड के मौसम में सरसों की खेती करना ज्यादा उपयुक्त होता तो 15 से 25 सेल्सियस के तापमान की आवश्यकता होती है। हर तरह की मिट्टी में इसकी खेती संभव है। बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। डॉक्टर द्विवेदी की मानें तो सरसों की खेती के लिए हर साल बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं। पिछले साल सरसों की खेती की उपज से ही दानों को बीज की तरह उपयोग कर सकते हैं। खेत को भूरभूरा बनाकर उसमें बुवाई की जा सकती है। पूसा सरसों 30 और पूसा डबल जीरो सरसों 31 अच्छी वैराइटियां हैं। यह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा विकसित की गईं हैं।

वैज्ञानिक डॉ. आदित्य प्रकाश द्विवेदी कहते हैं कि खेत में दीमक, चितकबरा और अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए अंतिम जुताई के समय क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से अंतिम जुताई के साथ खेत मे मिलना चाहिए। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए 02 से 03 किग्रा एजोटोबेक्टर एवं पीएबी कल्चर की 50 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई से पूर्व मिलाना चाहिए। बुवाई के लिए सीडड्रिल मशीन का उपयोग सर्वोत्तम रहता है। खर-पतवार नियंत्रण के लिए निराई गुड़ाई बुवाई के तीसरे सप्ताह के बाद से नियमित अंतराल पर 02 से 03 बार करनी चाहिए।

आमोद

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