-केंद्र सरकार के समर्थन में उतरा ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल
कानपुर (हि.स.)। मदरसों में शिक्षा ग्रहण करने वाले कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति अब बंद कर दी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए दिए जाने वाली धनराशि पर रोक लगा दी है। इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम धर्मगुरु विरोध जता रहें है। जबकि सरकार के इस निर्णय का समर्थन कानपुर के ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल कर रहा है। उनका कहना है कि मदरसों के नाम पर सक्रिय माफिया गैंग पर लगाम लगेगी। वे अब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के महासचिव हाजी सलीस ने कहा उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह ने मदरसों को फंड देने की शुरुआत की थी। जबकि इससे पूर्व मदरसों को कोई फंड और सरकार से मदद नहीं मिलती थी। लेकिन उप्र में राजनाथ सिंह ने इसे चालू किया। जिसके बाद मदरसों में जिस तरह से माफिया गैंग फैक्ट्री शुरू हो गई। वह पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। मदरसे कमाई का अड्डा बन गए।
हाजी सलीस कहना है कि फर्जी मदरसे तैयार करके विज्ञापन का सहारा लेकर वसूली कर रहे और प्रबंधन तंत्र का रौब दिखाकर लाखों रुपये लेकर लोगों को नौकरी दे रहे हैं। कानपुर में भी कई ऐसे मदरसे हैं जो पूरी तरह से फर्जी हैं लेकिन वह अनुदानित मदरसों में शामिल हैं। इस पूरे खेल में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक शामिल होते हैं जो मदरसों को गलत तरीके से फंड मुहैया कराने में सहयोग करते है।
उन्होंने बताया कि मामले को लेकर ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बरेलवी ने केन्द्र सरकार को एक खत भी लिखा था। मदरसों को दी जा रही सुविधाओं से यदि भ्रष्टाचार पनप रहा है उसे पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। मुफ्ती की पढ़ाई करने वाले लोगों के कोर्स में एक पाठ यह भी होना चाहिए जिसमें उन्हें फतवा जारी करने से पहले यह मालूम हो कि हिन्दुस्तान का कानून सेकुलर लोगों के लिए है, न कि किसी विशेष धर्म से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि जो फैसला हुआ है, उसका हम स्वागत करते हैं और जो मानक के विपरीत मदरसे चला रहे हैं एवं उनसे जुड़े भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह पैसा सरकार मुसलमानों की तालीम के लिए देती है, न कि रिश्वत लेकर गलत तरीके से प्रयोग करने के लिए देती है।
राम बहादुर
