– सपा ने चित्रकूट जिले की मानिकपुर विधानसभा सीट से वीर सिंह पटेल को बनाया है प्रत्याशी
चित्रकूट (हि.स.)। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मोस्ट वांटेड रहे दुर्दांत डकैत रहे शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के पुत्र एवं समाजवादी पार्टी से चित्रकूट जिले की मानिकपुर विधानसभा सीट से घोषित प्रत्याशी वीर सिंह पटेल ने चुनाव लड़ने से इंकार कर देने से जहां बुंदेलखंड की सियायत गर्मा गई है। वहीं, उनके इस कदम से चुनाव से ठीक पूर्व पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत खडी हो गई है। ददुआ पुत्र पूर्व विधायक वीर सिंह जिले की सदर विधानसभा सीट चित्रकूट से टिकट की मांग रहे है।
समाजवादी पार्टी ने यूपी के चित्रकूट जिले की सदर विधानसभा सीट से युवा किसान नेता एवं पूर्व डीडीसी अनिल प्रधान (पटेल) को और दस्यु ददुआ के पुत्र वीर सिंह पटेल को मानिकपुर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। शुक्रवार को सपा प्रत्याशी दस्यु ददुआ के पुत्र वीर सिंह पटेल ने चित्रकूट जिले की मानिकपुर विधानसभा सीट से चुनाव लडने से इंकार कर बुंदेलखंड की सियासत गर्म कर दिया है।
वीर सिंह पटेल का मानना है कि उनके पिता शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ ने अपने बागी जीवन के करीब चार दशक पाठा क्षेत्र में व्यतीत किया है। इस दौरान पिता द्वारा किये गये आपराधिक कृत्यों को लेकर स्थानीय लोग एकजुट हो रहे है। जिसको दृष्टिगत रख उन्होंनेे मानिकपुर विधानसभा सीट से चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।
बताया कि उनके इस निणर्य के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वार्ता के लिए उन्हें लखनऊ बुलाया है। वीर सिंह ने बताया कि दो दिन से टिकट को लेकर अपने मित्रों एवं शुभचिंतकों से मंथन कर रहे थे। उनका कहना है कि वह जिले की सदर विधानसभा सीट से विधायक रहे है। साथ ही इसी सीट से वह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अचानक पार्टी द्वारा चित्रकूट की बजाए मानिकपुर विधानसभा सीट से टिकट दे दिया गया। इतने कम समय में सयासी जमीन तैयार करना बड़ा मुश्किल है। इसलिए पार्टी प्रमुख को मानिकपुर सीट से चुनाव न लड़ने की जानकारी दे दी है। पार्टी किसी को भी अब चुनाव मैदान में उतार सकती है और वह एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे।
वर्ष 2007 में मारे गये डकैत ददुआ के पुत्र सपा प्रत्याशी वीर सिंह पटेल 2012 में जिले की सदर सीट से विधायक चुने जा चुके है। इससे पूर्व वह 2005 में पिता दस्यु ददुआ की हनक पर निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बने है। वहीं 2017 में इसी सीट से फिर चुनाव लड़े थे। उनको 63,430 वोट मिले थे और भाजपा के चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय से 26,936 मतों से चुनाव हार गए थे। इस बार भी वह इसी सीट से टिकट मांग रहे थे।
रतन
