-भाजपा के किसी भी उम्मीवार पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं
-बसपा के 07, सपा के 05, कांग्रेस व भाजपा के 04-04 उम्मीदवार करोड़पति
लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधान सभा की रिक्त हुई सात सीटों पर हो रहे उपचुनाव को लेकर जहां सियासी पारा गरम है वहीं 88 में से 87 उम्मीदवारों के विश्लेषण में सामने आया है कि 18 यानी 21 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। वहीं 15 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। भाजपा के किसी उम्मीदवार पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।
उप्र इलेक्शन वाच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने यह विश्लेषण 87 उम्मीदवारों के दिए शपथ पत्रों के आधार पर किया है। उपचुनाव में कुल 88 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें टूंडला विधानसभा से राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के उम्मीदवार भूपेंद्र कुमार धनगर का शपथ पत्र स्पष्ट नहीं होने के कारण उनका विश्लेषण नहीं किया गया है।
इसमें सामने आया है कि बसपा के 07 में से 05 यानी 71 प्रतिशत, समाजवादी पार्टी के 6 में से 5 यानी 83 प्रतिशत, कांग्रेस के 06 में से 01 यानी 17 प्रतिशत और निर्दलीय 22 में से 3 यानी 14 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले मामलों की जानकारी दी है।
पार्टी के हिसाब से आंकड़ों को देखें तो बसपा के 05 यानी 71 प्रतिशत, सपा के 05 यानी 83 प्रतिशत और 02 निर्दलीय यानी 9 प्रतिशत उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं एक उम्मीदवार ने अपने ऊपर दुष्कर्म से संबंधित मामला घोषित किया है। इसी तरह एक उम्मीदवार पर हत्या का मामला भी दर्ज है। वहीं चार उम्मीदवारों ने अपने ऊपर हत्या का प्रयास से संबंधित मामलों की जानकारी दी है।
उपचुनाव में 07 में से 02 संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां 03 या उससे अधिक उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। खास बात है कि उम्मीदवारों के चयन में राजनीतिक दलों पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है क्योंकि उन्होंने फिर से आपराधिक मामले वाले लगभग 21 प्रतिशत उम्मीदवारों को टिकट देने की अपनी पुरानी प्रथा का पालन किया है। उपचुनाव में भाजपा को छोड़कर सभी प्रमुख दलों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित करने वाले 17 से 83 प्रतिशत उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं।
इसके साथ ही उपचुनाव में पांच करोड़ से अधिक संपत्ति वाले 15 उम्मीदवार, दो करोड़ से पांच करोड़ की संपत्ति वाले 10 उम्मीदवार, पचास लाख से दो करोड़ की संपत्ति वाले 21 उम्मीदवार, दस लाख से पचास लाख की संपत्ति वाले 21 और दस लाख से नीचे की संपत्ति वाले 20 उम्मीदवार सियासी मैदान में हैं। इस तरह 87 में से 34 यानी 39 प्रतिशत करोड़पति उम्मीदवार हैं। इनमें बसपा के सभी सातों यानी 100 प्रतिशत, सपा के 06 में से 05 यानी 83 प्रतिशत, कांग्रेस के 06 में से 04 यानी 67 प्रतिशत, भाजपा के 07 में से 04 यानी 57 प्रतिशत और निर्दलीय 22 में से 6 यानी 27 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं।
विश्लेषण के मुताबिक उपचुनाव में उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 2.91 करोड़ है। मुख्य दलों में बसपा के सात उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 2.89 करोड़, भाजपा के सात उम्मीदवारों की 2.45 करोड, सपा के छह उम्मीदवारों की 13.69, कांग्रेस के छह उम्मीदवारों की 3.40 करोड़ और निर्दलीय 22 उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 2.31 करोड़ है।
वहीं अगर अधिकतम संपत्ति वाले उम्मीदवारों की बात करें तो सपा के देवरिया से उम्मीदवार ब्रह्माशंकर त्रिपाठी की कुल संपत्ति 31 करोड़ से अधिक है। जौनपुर की मल्हनी से निर्दलीय उम्मीदवार धनंजय सिंह की संपत्ति 23 करोड़ से अधिक है और बुलंदशहर से रालोद के प्रवीण कुमार सिंह की कुल संपत्ति 21 करोड़ से अधिक है।
उपचुनाव में उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता पर नजर डालें तो 26 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योगिता पांचवी से बारहवीं के बीच घोषित की है। जबकि 47 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता स्नातक और इससे ज्यादा घोषित की है। एक उम्मीदवार ने अपनी शैक्षिक योग्यता असाक्षर और 10 उम्मीदवारों ने साक्षर घोषित की है। विधानसभा उपचुनाव में कुल 9 यानी 10 प्रतिशत महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं।
