Thursday, January 15, 2026
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गोवंश की दुर्दशा पर DM नाराज़, रोज 2 बार होगा गोशालाओं का निरीक्षण

संवाददाता

गोंडा। गोवंश की उपेक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने प्रशासन को झकझोर दिया है। भीषण गर्मी के इस दौर में जनपद के सभी गो-आश्रय स्थलों पर बदहाल व्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि गोवंश की देखभाल कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक और मानवीय जिम्मेदारी है।

पंचायत सचिव को रोज दो बार निरीक्षण का निर्देश
जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक पंचायत सचिव सुबह और शाम—दोनों समय अपने क्षेत्र के गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण करें और फोटोग्राफ्स के साथ रिपोर्ट संबंधित वाट्सएप समूह में साझा करें। गोवंश को गर्मी, प्यास और अव्यवस्था से बचाने के इस सख्त निर्देश के पीछे जिलाधिकारी की संवेदनशीलता और कठोर प्रशासकीय प्रतिबद्धता दोनों स्पष्ट दिखाई देती है।

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अत्यंत खेदजनक एवं अस्वीकार्य व्यवस्था-डीएम
नेहा शर्मा ने कहा कि कुछ गो-आश्रय स्थलों पर पेयजल, हरा चारा, चिकित्सा और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने इस स्थिति को ‘अत्यंत खेदजनक एवं अस्वीकार्य’ करार देते हुए तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी का यह बयान प्रशासनिक तंत्र को झकझोरने वाला है।

खंड विकास अधिकारी करेंगे रैंडम निरीक्षण
डीएम ने खंड विकास अधिकारियों को दोहरी जिम्मेदारी सौंपी है। एक ओर वे पंचायत सचिवों से नियमित निगरानी करवाएंगे, वहीं दूसरी ओर वे खुद भी रैंडम निरीक्षण करेंगे। यदि निरीक्षण में कोई कमी या लापरवाही पाई जाती है, तो उस पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गोवंश की किसी भी प्रकार की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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पशु चिकित्सा विभाग को मिली जवाबदेही
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को भी निर्देश दिया गया है कि वे पंचायत सचिवों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट्स और तस्वीरों का सूक्ष्म विश्लेषण करें। गोवंश से संबंधित समस्याएं जो उनके स्तर से हल की जा सकती हैं, उन्हें बिना देरी के हल करें। साथ ही, वे हर शनिवार को विकासखंडवार रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रस्तुत करेंगे, जिससे उच्चस्तर पर समीक्षा की जा सके।

गर्मी में संकट झेलते गोवंश को मिलेगी राहत
जिलाधिकारी के इस निर्णय से अब यह उम्मीद जगी है कि गोवंश को लेकर व्याप्त अव्यवस्थाएं शीघ्र ही सुधरेंगी। यह न केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि जानवरों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण का प्रतिबिंब भी है। इस निर्णय के बाद अधिकारियों में हलचल है और हर स्तर पर सतर्कता देखी जा रही है।

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