जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। जिले में घाघरा, सरयू, टेढ़ी और बिसुही नदियों में आने वाली बाढ़ से निपटने की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिले में तबाही मचाने वाली घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 01.89 मीटर तथा अयोध्या में सरयू नदी 03.24 मीटर नीचे प्रवाहित हो रही है। दिन-रात 24 घंटे के लिए कर्मचारियों की तैनाती करते हुए बाढ़ नियंत्रण केन्द्र स्थापित किया जा चुका है। बाढ़ से प्रभावित होने वाली जिले की तीन तहसीलों में 24 बाढ़ चौकियां स्थापित करके कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल सक्रिय कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि जिले में घाघरा और सरयू नदियों से बचाव के लिए 140 किमी. लम्बा चार तटबंध बनाए गए हैं। इनमें परसपुर-धौरहरा तटबंध 60 किमी, एल्गिन-चरसड़ी तटबंध 52.400 किमी, सकरौर-भिखारीपुर तटबंध 22.600 किमी तथा भौरीगंज रिंग बांध 04.600 किमी लम्बा है। उन्होंने बताया कि तरबगंज तहसील में 12, कर्नलगंज में 11 तथा मनकापुर में एक बाढ़ चौकी स्थापित कर कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं। आवश्यकतानुसार उन्हें सक्रिय कर दिया जाएगा। इसके साथ ही तीनों तहसीलों में 31 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं, जहां विस्थापित लोगों को ठहराए जाने की व्यवस्था की गई है। उच्चतम बाढ़ की स्थिति में जिले के 104 ग्राम पंचायतों की करीब ढ़ाई लाख की आबादी के प्रभावित रहने की संभावना रहती है। गत वर्ष जिले की 47 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई थीं, जिसमें 18 को मेरुण्ड (सड़क सम्पर्क से कट जाना) घोषित किया गया था। बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली राहत किट तथा भूसा इत्यादि का टेंडर हो गया है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पीएसी (बाढ़ यूनिट) की एक बटालियन बाढ़ के दौरान नियमित रूप से जिले में तैनात रहती है। इसके अलावा जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एनडीआरएफ) व राज्य आपदा मोचक बल (एसडीआरएफ) के साथ भी लगातार समन्वय रखता है, जिससे आपात स्थिति में उनका भी सहयोग लिया जा सके। इस बार शासन के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं को डिग्निटी किट भी प्रदान की जाएगी, जिसमें एक सेनेटरी पैड, नहाने व कपड़ा धोने का साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा, डिस्पोजबिल बैग, ढ़क्कन वाली बाल्टी व जग शामिल किया गया है। डीएम ने कहा कि हाल के दिनों में आकाशीय बिजली गिरने से राज्य में कई लोगों की मौतें हुईं हैं। इससे बचने के लिए उन्होंने जनपद वासियों से अनुरोध किया है कि वे अपने मोबाइल पर दामिनी एप इंस्टाल करके रखें। आकाशीय बिजली गिरने की संभावना होने पर उन्हें कुछ समय पूर्व ही संदेह प्राप्त हो जाएगा और वे अपना बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से गांवों में आपदा मित्र बनाए जा रहे हैं। प्रेस वार्ता में अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी, प्रशिक्षु पीपीएस शिल्पा वर्मा, जिला आपदा प्रबंधक राजेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
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