जिले के लोढ़ियाघाटा निवासी मनोविज्ञान का प्रोफेसर गीता ज्ञान पर करेगा शोध
आईसीएसएसआर ने गीता ज्ञान परियोजना के लिए स्वीकृत किए 18 लाख, दिल्ली एनसीआर में होगा अध्ययन
अतुल अद्वैत
गोंडा। क्या कुरुक्षेत्र के मैदान में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता ज्ञान किशोरों को तनाव और अवसाद से उबार सकता है? इस पर शोध की तैयारी है। जिले के लोढियाघाटा निवासी तथा हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ में मनोविज्ञान विभाग के सहआचार्य डॉ. रवि प्रताप पांडेय को शिक्षा मंत्रालय की भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) ने 18 लाख की रिसर्च परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। यह शोध परियोजना ‘रोल ऑफ योगिक प्रैक्टिसेज एंड श्रीमद्भगवद्गीता फॉर एन्हांसिंग द वेलबीइंग ऑफ स्कूल गोइंग एडोलेसेंट्स’ शीर्षक से स्वीकृत हुई है।
डा. पांडेय बताते हैं कि कक्षा नौ से 12 में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं पर बेहतर प्रदर्शन का अत्यधिक दबाव है। इसके चलते वे तनाव, मानसिक दबाव, भावनात्मक असंतुलन, आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़ी चुनौतियों से जूझते हैं। कई बार वे आत्महत्या तक कर लेते हैं। इसे देखते हुए उन्होंने महाभारत के युद्धक्षेत्र कुरुक्षेत्र में अर्जुन के मानसिक द्वंद्व और विषाद को दूर करने वाले गीता ज्ञान को अब आधुनिक किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की तैयारी की है। उनका मानना है कि यदि गीता में वर्णित श्रीकृष्ण के उपदेश से अर्जुन जैसे महाप्रतापी धनुर्धर का मानसिक द्वंद्व और विषाद समाप्त हो सकता है, तो यह गीता ज्ञान किसी पर भी काम करेगा। किशोरों पर कुछ ज्यादा ही, क्योंकि यह अवस्था सर्वाधिक तेजी से सीखने वाली होती है।
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डा. पांडेय ने बताया कि आईसीएसएसआर ने इस वर्ष देशभर में 250 शोध प्रस्ताव विभिन्न विषयों पर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें उनकी गीता ज्ञान परियोजना भी शामिल है। इस अध्ययन में नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. गोवर्धन कुमार सिंह सह-अन्वेषक के रूप में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि दो वर्षों तक चलने वाले इस अध्ययन में दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लगभग 1500 विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। परियोजना वर्ष 2028 तक पूरी होगी।
गीता ज्ञान परियोजना के तहत अध्ययन में शामिल होने वाले स्कूलों का चयन उनकी सहमति के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक जिले में दो से तीन विद्यालय चुने जाएंगे। विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक आकलन से पहले अभिभावकों की सहमति ली जाएगी। जिन स्कूलों और अभिभावकों की अनुमति मिलेगी, केवल उन्हीं विद्यार्थियों को अध्ययन में शामिल किया जाएगा।
गीता ज्ञान परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित योगिक सिद्धांतों और अभ्यासों का किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, आत्मनियंत्रण, निर्णय क्षमता और मनोवैज्ञानिक दृढ़ता पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। शोध पूरा होने के बाद विस्तृत प्रतिवेदन आईसीएसएसआर को सौंपा जाएगा। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसे भविष्य में विद्यालयी कार्यक्रमों और शैक्षिक नीति में भी शामिल किए जाने की संभावना है।
डा. रवि के अनुसार, गीता ज्ञान पर आधारित यह शोध पूरा होने के बाद प्रतिवेदन आईसीएसएसआर को सौंपा जाएगा। यदि निष्कर्ष सकारात्मक रहे तो इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर विद्यालयों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया जा सकता है।
एलबीएस के छात्र रहे हैं रवि
डॉ. रवि ने श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद बीएचयू से मनोविज्ञान में परास्नातक और वहीं से पीएचडी किया। वर्ष 2017 से 2020 तक उन्होंने बिहार में शिक्षण कार्य किया। इसके बाद उनका चयन केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ में हो गया। कालेज के प्राचार्य प्रो. रवींद्र पांडेय, मुख्य नियंता अमन चंद्रा, प्रो. जितेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. ममता शर्मा, डा. ममता शुक्ला, प्रो. मंशाराम वर्मा आदि ने बधाई दी है।
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