मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित न किए जाने को बृजभूषण सिंह ने बताया अपमान
अतुल अद्वैत
गोंडा। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में रहे बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित नहीं किए जाने के कारण वह पिछले चार वर्षों से मंदिर नहीं गए हैं और इसे उन्होंने अपना अपमान बताया।
एक साक्षात्कार में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, ‘यूं ही कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो रुसवाइयां रही होंगी।’ उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में लगभग छह हजार लोगों को बुलाया गया था। इनमें ऐसे लोग भी शामिल थे जो उनकी विचारधारा से नहीं जुड़े थे, लेकिन उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। पूर्व सांसद ने कहा, ‘जहां अपमान हो, वहां जाने का कोई सवाल ही नहीं है।’ उन्होंने बताया कि वह हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन कर लेते हैं, लेकिन राम मंदिर कभी नहीं गए। उनका मानना है कि भगवान राम हर घर और हर दिल में बसते हैं। इसलिए उनके दर्शन कहीं भी किए जा सकते हैं।
राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) इसकी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का बच्चा-बच्चा जानता है, कौन लोग इसमें संलिप्त हैं। एक बार एसआईटी की रिपोर्ट आने दीजिए। उसके बाद जनता स्वयं निर्णय कर लेगी कि जांच सही हुई है या गलत।
भगवान राम के क्षत्रिय होने संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि श्रीराम का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में सर्व समाज को साथ लेकर चलने का कार्य किया। पूर्व सांसद ने कहा कि राम केवल क्षत्रिय नहीं, बल्कि एक महामानव और मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उन्हें किसी एक जाति में बांधने की आवश्यकता नहीं है।
बृजभूषण शरण सिंह राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान सक्रिय रहे थे। वह वर्ष 1990 के दशक में चले आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए जाने वाले शुरुआती नेताओं में शामिल थे। छह दिसंबर 1992 की बाबरी ढांचा विध्वंस घटना के समय भी वह अयोध्या में मौजूद थे। बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें अन्य नेताओं के साथ आरोपी बनाया था, जिन्हें विशेष अदालत ने 30 सितंबर 2020 को बरी कर दिया था।
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