सहकारिता के पुराने कानूनों में बदलाव होना चाहिए
लखनऊ (हि.स.)। सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री उदय जोशी ने ”आगामी कार्य की दिशा” विषय पर बोलते हुए कहा कि सहकारिता में परिवारवाद की भावना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सहकार भारती सहकारिता के क्षेत्र में काम करने वाला स्वयंसेवी संगठन है। जिन्न उद्देश्यों के साथ विगत 40 वर्षों से हम लोग काम कर रहे हैं उस विचारधारा से जुड़कर और उसको ध्यान में रखकर सहकार भारती का कार्य करना है। वह राजकीय पालीटेक्निक परिसर स्थित सहकार भारती के अधिवेशन के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।
उदय जोशी ने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि सहकार भारती का कार्य करते समय हमें तीन बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
1. बिना संस्कार नहीं सहकार
2. दलगत राजनीति से परे होना चाहिए सहकारिता आंदोलन
3. सहकारी समितियों में हमारी भूमिका ट्रस्टी के रूप में होनी चाहिए मालिक की नहीं।
सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री उदय जोशी ने कहा कि देश में स्थाई आर्थिक विकास सहकारिता के माध्यम से हो सकता है। ऐसे में अगर संस्कारित कार्यकर्ता सहकार आन्दोलन से जुड़ेंगे तो सहकारिता ठीक से चलेगी।
दूसरे बिन्दु की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन राजनीति से परे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस संगठन में मालिकाना हक जताने की बात होने लगती है वह संगठन लम्बे समय तक नहीं चल सकता।
उदय जोशी ने कहा कि पहले देश में सहकारिता की नई नीति बननी चाहिए और सहकारिता के पुराने कानूनों में संशोधन होना चाहिए। जोशी ने बताया कि सहकारिता के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति में नहीं संगठन में ताकत होती है। संगठन में अनुशासन भी आवश्यक है। अनुशासन नहीं रहेगा तो संगठनात्मक ढांचा ठीक से नहीं चल पायेगा।
जिस क्षेत्र में हम लोग काम कर रहे हैं उस क्षेत्र का अध्ययन हमारे सभी कार्यकर्ताओं को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी आवश्यक है।
इस सत्र में मंच पर सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश वैद्य उपस्थित रहे। इसी सत्र में नेपाल राष्ट्र से आए सहकार भारती के कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया।
बृजनंदन
