वाराणसी(हि.स.) । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को वाराणसी में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों को सम्मानित किया। चौकाघाट स्थित गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल सभागार में लाभान्वित लोगों को सम्मानित करने के उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 130 करोड़ लोगों को यह बताया कि शहर से लेकर गांव तक देश में कैसे स्वच्छता रखा जा सकता है। शहर से लेकर गांव तक सफाई कर्मियों द्वारा जब रात-दिन मेहनत कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को मूर्तरूप दिया जा रहा है, हम सबका दायित्व बनता है कि उनका सम्मान किया जाए। उन्होंने सफाई कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उनके लिये तमाम कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। प्रधानमंत्री सुमंगला योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री स्व निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, ई-श्रम कार्ड एवं ई-पेंशन कार्ड आदि योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजनाएं गरीबों एवं समाज की अंतिम पंक्ति तक के लोगों के जीवन में खुशहाली भरने के लिए हैं।
उन्होंने लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि मौके पर लगे स्टालों पर जाकर आवश्यकतानुसार अपनी पात्रता के आधार पर फार्म भरें और योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि पात्र लाभार्थियों के आवेदन पत्र स्टालों पर आज अधिक संख्या में भरवाए जाएं और उन्हें प्राथमिकता पर स्वीकृति कर लाभान्वित किया जाए। उन्होंने महिलाओं से कहा की स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए कैंप में जाकर वह अपना सर्वाइकल एवं कैसर आदि की निःशुल्क जांच कराएं। उन्होंने बताया कि विश्व में कैंसर के सभी मामलों में 25 फीसदी भारत में हैं। भारत में 100 कैंसर की पीड़ित महिलाओं में से 60 की मृत्यु हो जाती है। 30 वर्ष के पश्चात महिलाओं को सर्वाइकल एवं विशेष रूप से स्तन कैंसर की जांच नियमित रूप से कराया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए महिलाओं से कहा कि महिलाएं पूरे परिवार की चिंता करती हैं और उनकी चिंता उन्हें है। इसीलिए यहां के अधिकारियों ने महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा कैम्प का आयोजन किया है। कैम्प में जांच निःशुल्क है और यदि जांच उपरांत दवा की आवश्यकता पड़ेगी, तो वह भी पूरी तरह निःशुल्क है। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रतीकात्मक रूप से उद्यान विभाग के संतोष कुमार साहनी, मुकेश कुमार, महावीर पाण्डेय, प्रकाश सोनकर, जगदीश प्रसाद, देवी दयाल प्रजापति, जयप्रकाश गुप्ता, अजीत कुमार सिंह, को ई-श्रम कार्ड, रामबचन, राजकुमार, मोहनलाल, ईश्वर चंद यादव, राहुल प्रजापति, प्रदीप कुमार को प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना का प्रमाण पत्र तथा सरिता प्रजापति को प्रधानमंत्री स्व निधि योजना का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएं। तत्पश्चात उन्होंने राजभवन से लायी गई साड़ियों को नगर निगम की सफाई कर्मियों क्रमशः अजोरा देवी, शशि कला देवी, मन भावती देवी, रंजू भारती, कमला देवी, नीलम देवी, सविता देवी, माया देवी, नीतू सिंह, सोनी पांडेय, निन्नी, नीलू देवी, कृष्णा देवी और रुखसाना को अपने हाथों से दिया।
इसके पहले उन्होंने मौके पर लगे स्टालों का भी निरीक्षण किया। कार्यक्रम मे जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, नगर आयुक्त प्रणय सिंह, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण ईशा दुहन, मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति, भाभा इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ, रेड क्रॉस सोसाइटी के अधिकारी आदि उपस्थित रहे।
—कोरोना वैक्सीन की भांति भारत मे कैंसर की वैक्सीन भी बनाई जा रही है
प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने शुक्रवार को जिला प्रशासन स्थानीय स्कूल, और बीएचयू के सहयोग से कमिश्नरी सभागार में आयोजित सर्वाइकल, कैंसर स्क्रीनिंग व किशोरियों के ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान राज्यपाल ने 150 किशोरियों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए परिवार को सजग रहने की अपील किया। उन्होंने गुजरात में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि कार्यकाल में लगभग दो करोड़ महिलाओं का जांच 2 महीने में हुआ था। जिसमें 2000 महिलाएं कैंसर से पीड़ित पाई गई थी, उनका इलाज कराया गया, आज वे स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि कोरोना के वैक्सीन की भांति ही भारत मे कैंसर की वैक्सीन भी बनाई जा रही है। जो शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएगा। इसका लाभ समूचे देश के ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों को भी मिलेगा। इस संबंध में भारत सरकार एवं आईसीएमआर के अधिकारियों से भी वार्ता हुई है। वैक्सीन का मूल्य न्यूनतम रखे जाने की अपील की गई है। जिसका मूल्य 100 या 200 रुपये से अधिक कतई न होने पाए।
श्रीधर
