वाराणसी (हि.स.)। पंचगंगा घाट स्थित प्राचीन बिंदु माधव मंदिर-धरहरा मस्जिद प्रकरण में सोमवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) आकाश वर्मा की अदालत मेंं सुनवाई हुई। इस मामले में न्यायालय ने सुनवाई की अगली तिथि 20 अगस्त तय की है। इस प्रकरण में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने जिलाधिकारी को नोटिस भी जारी किया है।
वादी पक्ष ने अपने अधिवक्ताओं के जरिये प्रतिवादियों के मस्जिद परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कहा है कि यहां मस्जिद नहीं, बिंदु माधव मंदिर है। याचिका में कहा गया है कि पंचगंगा घाट स्थित प्राचीनतम बिंदुमाधव मंदिर मां गंगा के तट पर स्थित है। ये हजार साल पुराना मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु का विग्रह है, जहां सनातन हिंदू धर्म को मानने वाले नित्य पूजन-अर्चन, राग-भोग, आरती करते रहे हैं। इसका वाराणसी गजेटियर 1965 में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर व बिंदुमाधव मंदिर के ध्वस्तीकरण का जिक्र किया गया है। उस गजेटियर में औरंगजेब के आदेश से दोनों मंदिरों को गिराया गया था। याचिका के जरिये कहा गया है कि बिंदु माधव मंदिर के ध्वस्तीकरण के बाद मुस्लिम उपासना स्थल का निर्माण मुस्लिम शासकों ने कराया। आज भी मौके का अवलोकन करने से स्पष्ट पता चलता है कि पुराने मंदिर के अवशेष पर मुस्लिम उपासना स्थल का निर्माण कराया गया है। भारत सरकार के आदेश से उस प्राचीन स्मारक को पुरातात्विक स्थल घोषित किया गया है। इसके तहत इस स्मारक के सौ मीटर की सीमा में आने वाले क्षेत्र में निर्माण खनन, मरम्मत, प्रयोजन निषिद्ध घोषित किया गया है। इसका उल्लंघन करने पर दो वर्ष कारावास या एक लाख का जुर्माना या दोनों हो सकता है। मगर इन आदेशों व नियमों की उपेक्षा कर प्रतिवादी गण बिंदु माधव प्राचीन स्थल पर अनाधिकार रूप से जुड़े अन्य लोग प्रवेश करते हैं। धरहरा मस्जिद मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी। गायघाट निवासी अतुल कुल सहित पांच अन्य की ओर से ये याचिका दायर की गई है। अदालत वाद को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज कर सुनवाई कर रही है।
श्रीधर
