– धूल गर्द गुबार से निजात की अरसे से उठाई जा रही थी मांग
मीरजापुर(हि.स.)। पर्यावरण प्रदूषण के चाबुक की मार से इन दिनों चुनार तहसील के अहरौरा क्षेत्र के खनन इलाके का क्रशर उद्योग सहम सा गया है। कारोबार से जुड़े लोग कार्रवाई को लेकर सशंकित हैं। हालांकि मानकों और नियमों का पालन करने एवं कराने को लेकर पत्थर उद्योग से जुड़े लोगों में दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है, परंतु विभागीय नोटिस को लेकर बेचैनी बनी हुई है। धूल, गर्द-गुबार व हैवी ब्लास्टिंग में इन दिनों आई कमी के चलते ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम ने पर्यावरण प्रदूषण के मानकों को पूरा कराने के लिए क्रशर उद्योग के विरुद्ध नोटिस जारी करने की कार्यवाई की तो पत्थर क्रॅशिंग कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कम्प मचा हुआ है। नोटिस की कार्यवाही के लिए उन क्रशर प्लांटों को चिह्नित किया जा रहा है जिन्होंने पत्थर क्रशिंग प्रक्रिया के दौरान मानकों को ही दरकिनार कर दिया है। प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई में नोटिस का अपेक्षित जवाब न मिलने के चलते ड्रोन कैमरे से वायु प्रदूषण की वीडियो फुटेज बनवाकर शासन को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। इसे लेकर भी क्रशर उद्योग से जुड़े लोगों की धड़कन बढ़ी हुई है। इन क्रशर प्लांटों पर आरोप है कि स्टोन क्रशिंग प्रक्रिया के दौरान उपकरणों को ढकने की मुकम्मल व्यवस्था, जल छिड़काव एवं उद्योग स्थल पर हरित पट्टीका विकसित नहीं किया जाना पाया गया है, जो वायु अधिनियम के तहत गम्भीर अपराध है। ब्लास्टिंग और क्रशिंग में आई कमी से वायु प्रदूषण में भी गिरावट देखी गई है। इससे क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने भी राहत महसूस किया है।
बर्बाद होने से बचेगी किसानों की फसल
सोनपुर के किसानों ने कहा कि हमारा उद्देश्य क्रशर प्लांट बंद कराना नहीं है। बल्कि लापरवाही के चलते उपजे वायु प्रदूषण के असर को कम करना है ताकि फल-फूल और फसलों की खेती को सुरक्षित किया जा सके। भगवती देई के किसानों की माने तो इस कारोबार से कामगारों को रोजगार मिला है। नियमों के अंतर्गत क्रशर प्लांट चले तो कोई हर्ज नहीं। जागरूकता से खेती किसानी और फसलों को बचाया जा सकता है।
क्रशर उद्योग की बंदी से मजदूरों की आजीविका प्रभावित
क्रशर प्लांटों की सीजर प्रक्रिया के तहत की गई प्रशासनिक कार्रवाई से रोज कमाने खाने वाले दैनिक मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। उनके सामने भी रोजी-रोटी की समस्या तथा आजीविका का संकट बना हुआ है। खदानों मे पत्थरों की ढुलाई से जुड़े लोग भी आर्थिक संकट झेल रहे हैं। जो क्रशर प्लांट बचते बचाते चल रहे हैं वहां से भी कामगारों तथा मजदूरों को हटा दिया गया है। प्रचंड गर्मी की मार से बेहाल मजदूर काम की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं।
गिरजा शंकर
