मेरठ (हि.स.)। राजस्थान में महिला डॉक्टर द्वारा आत्महत्या किए जाने के विरोध में शुक्रवार को आईएमए के बैनरतले निजी डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर डॉक्टरों ने कोई मरीज नहीं देखा और प्रदर्शन कर विरोध जताया।
राजस्थान में एक मरीज के इलाज के दौरान मौत होने पर पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में महिला डॉक्टर ने खुद को बेगुनाह बताया। इससे पूरे देश के डॉक्टरों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शुक्रवार को मेरठ में भी डॉक्टरों ने हड़ताल रखी। आईएमए अध्यक्ष डॉ. रेनू भगत और सचिव डॉ. अनुपम सिरोही ने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर डॉक्टरों के क्लीनिक, अस्पतालों में ओपीडी, रेडियो डाइग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर बंद रहे। आईएमए के 1250 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया।
शुक्रवार को आईएमए हॉल में डॉक्टरों की बैठक हुई, जिसमें महिला डॉक्टर के सुसाइड प्रकरण पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। उत्पीड़न के बाद भयभीत डॉक्टर आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों का उपचार कैसे होगा। डॉक्टरों ने मांग उठाई कि डॉ अर्चना शर्मा और डॉ सुमित उपाध्याय पर धारा 302 लगाने वाले पुलिस अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाए। उन पर डॉ. अर्चना शर्मा को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुक़दमा दर्ज हो। असामाजिक तत्वों और स्थानीय नेता की पहचान करके गिरफ़्तारी की जाए। पुलिस और प्रशासन की असंवेदनशील और गैरकानूनी कार्रवाई को देखते हुए अधिकारियों को निलम्बित किया जाए। चिकित्साकर्मियों के विरुद्ध दर्ज होने वाले मामलों में नई गाइडलाइन जारी हो। बैठक में डॉ. वीरोत्तम तोमर, डॉ. वीएन त्यागी, डॉ. ऋषि भाटिया, डॉ. जेवी चिकारा, डॉ. विश्वजीत बैंबी आदि उपस्थित रहे।
कुलदीप
