– बेहतर उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण अनिवार्य, किसानों को दें जानकारी
झांसी(हि. स.)। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने जनपद की गौशालाओं की रिक्त भूमि एवं ग्राम सभा भूमि पर नेपियर, गिनी घास, सहजन तथा चारा नागफनी के उत्पादन पर जोर देते हुए कहा कि हरे चारे की उपलब्धता से गोवंश को जहां हरा चारा उपलब्ध होगा। वही, गोवंश के स्वास्थ्य में भी गुणात्मक सुधार होगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान खाद देने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह इंटरडिपेंडेंट है।
जिलाधिकारी ने भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के भ्रमण के दौरान उपस्थित किसानों से आवहान करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि खुली बैठक में या भ्रमण के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण के बाद ही फसल चयन की जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के उपरांत किसानों को फसल में कब और कितनी मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करना है, इसकी भी जानकारी प्राप्त हो सकेगी, ऐसा करने से उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि मृदा परीक्षण के बाद उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड अवश्य उपलब्ध कराएं ताकि उन्हें अपने खेत की सभी जानकारी मिल सके।
भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी एक बड़ी समस्या है, यदि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो तो यहां का किसान भी पंजाब के किसान की तरह संपन्न हो सकता है। उन्होंने “खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में” विधि का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि वर्षा जल का संरक्षण जरूरी है, साथ ही गांव के पानी को सुरक्षित करते हुए उसे प्रयोग में लाने के लिए प्रेरित करें। खेत पर मेड़ व मेड़ पर पेड़ के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि पेड़ खेत की मिट्टी का जहां क्षंरण रोकेगा, वहीं पेड़ से अतिरिक्त आय भी किसानों को प्राप्त होगी।
इस अवसर पर निदेशक डॉक्टर अमरेश चंद्रा, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉ एके दीक्षित, डीडीओ सुनील कुमार, सीवीओ डॉक्टर वाई के तोमर, डॉ महेंद्र प्रसाद सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
महेश
