Friday, April 17, 2026
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बिल्हौर : 66 वर्षों में पहली बार खिला कमल, राहुल बच्चा पर जीत बरकरार रखने की जिम्मेदारी

– कमल को खिलाने वाले भगवती सागर ने बदला पाला

– घाटमपुर सीट से सपा उम्मीदवार हैं भगवती सागर

कानपुर(हि.स.)। राम मंदिर आंदोलन की लहर में भी जीत नसीब न होने वाली बिल्हौर सीट पर पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई थी। इस सीट पर भाजपा को जीत दिलाने वाले भगवती सागर ने मोदी लहर में इतिहास लिख दिया और 66 वर्षों में पहली बार कमल खिला था। लेकिन अब भगवती सागर पाला बदलकर घाटमपुर से सपा उम्मीदवार हैं और बिल्हौर सीट पर भाजपा ने राहुल बच्चा पर दांव लगाया है। ऐसे में अब जीत बरकरार रखने की जिम्मेदारी राहुल बच्चा पर है।

राम मंदिर आंदोलन यानी 1991 में भाजपा ने कानपुर की सभी शहरी विधान सभा सीटों पर कब्जा कर लिया। यह क्रम लगातार तीन बार (1993 और 1996) चलता रहा लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की बिल्हौर सीट पर सपा और बसपा का कब्जा रहा। यही नहीं पिछले विधान सभा चुनाव यानी 2017 तक बसपा और सपा की ही जीत होती रही। जिससे यह माना जाने लगा कि यहां पर सपा और बसपा की ही जीत होगी और भाजपा के लिए जीत मुश्किल है, लेकिन पिछले विधान सभा चुनाव में मोदी लहर होने के चलते भाजपा के भगवती सागर ने एकतरफा जीत दर्ज कर ली।

भाजपा के लिए यह जीत 66 वर्षों में पहली बार थी। हालांकि भगवती सागर बसपा के पुराने बड़े चेहरे थे और तीन बार विधायक हो चुके थे। एक बार यानी 1996 में इसी सीट से बसपा से विधायक बने थे। लेकिन अबकी बार समीकरण फिर बदल गये। भगवती सागर भाजपा का दामन छोड़ साइकिल पर सवार हो गये और कानपुर की घाटमपुर सीट से सपा उम्मीदवार हैं। इस सीट पर भाजपा ने राहुल बच्चा पर दांव लगाया है और उन पर जीत बरकरार रखने की जिम्मेदारी है। वहीं सपा ने रचना सिंह और बसपा ने मधु गौतम तो कांग्रेस ने ऊषा कोरी को चुनाव मैदान में उतारा है।

कौन है राहुल बच्चा?

मोहित सोनकर उर्फ राहुल बच्चा काला बच्चा का बेटा है। 1993 में काला बच्चा को भाजपा ने बिल्हौर सीट से टिकट दिया था और दूसरे नंबर पर थे। इसके दूसरे साल जब प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी तो कानपुर में साम्प्रदायिक दंगा हो गया जिसमें काला बच्चा की हत्या कर दी गई थी। इस पर काला बच्चा को पार्टी शहीद मानती है और पार्टी कार्यालयों में आज भी शहीद के रुप में काला बच्चा की फोटो लगी हुई है। पिता की शहादत के बाद बचपन से ही राहुल बच्चा भाजपा से जुड़ गया और पिछले चुनाव में भी उम्मीदवारी की दावेदारी की थी और माना जा रहा था कि राहुल बच्चा उम्मीदवार होंगे, लेकिन ऐन वक्त पर बसपा से भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक व मंत्री भगवती सागर चुनाव में सामने आ गये। अन्तत: हुआ भी वही और पार्टी ने राहुल बच्चा की जगह भगवती सागर को टिकट दे दिया। लेकिन भगवती के सपा में जाने के बाद पार्टी ने राहुल बच्चा को उम्मीदवार बना दिया।

विधानसभा सीट पर कब कौन जीता

1951 में बृजरानी देवी— कांग्रेस

1957 में मुरलीधर कुरील— कांग्रेस

1962 में मुरलीधर कुरील— कांग्रेस

1967 में मोतीलाल देहलवी— सोशलिस्ट पार्टी

1969 में मोतीलाल देहलवी— सोशलिस्ट पार्टी

1974 में मोतीलाल देहलवी— बीकेडी

1977 में मोतीलाल देहलवी — जनता पार्टी

1980 में मोतीलाल देहलवी— जनता पार्टी

1985 में हनुमान प्रसाद कुरील— कांग्रेस

1989 में मोतीलाल देहलवी— जनता दल

1991 में शिव कुमार बेरिया— जनता पार्टी

1993 में शिव कुमार बेरिया— सपा

1996 में भगवती प्रसाद सागर— बसपा

2002 में शिव कुमार बेरिया— सपा

2007 में कमलेश चंद्र दिवाकर— बसपा

2012 में अरुण कुमारी कोरी— सपा

2017 में भगवती प्रसाद सागर— भाजपा

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