फर्रुखाबाद (हि.स.)। कायमगंज क्षेत्र में चीता होने की पुष्टि हो गई है। आग के पेड़ पर मोटी डाल पर आराम करता चीता कैमरे में कैद हो गया है।
क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से एक बाघ की चहल कदमी जहां एक और चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय लोगों में भय भी दिखाई दे रहा है। अभी दो-तीन दिन पहले ही कोतवाली क्षेत्र के गांव अताईपुर कोहना में चंद्रसेन राजपूत पुत्र उल्फत सिंह के नर्सरी वाले खेत में किसी हिंसक जंगली जानवर द्वारा नीलगाय का शिकार करके उसे खाने का दृश्य सामने आया था। मरे नीलगाय को वहीं जमीन में दफना दिया गया था। खेत में बने हिंसक जानवर के पंजों के निशान का फिंगरप्रिंट वन विभाग की टीम ने फॉरेंसिक लैब भेज कर जंगली जानवर के बारे में पता करने की बात कही थी। इतने दिन के बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई उत्तर जन सामान्य को नहीं मिला।
इसके बाद अभी कल ही गांव बरझाला निवासी हर्षवर्धन गंगवार ने कायमगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर स्थित टेडी कोन के पास बाघ को देखकर इसकी सूचना ग्रामीणों तथा वन विभाग की टीम को दी थी ।जहां पहुंचकर वन विभाग टीम ने फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करने के साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। दोनों ही बार वन विभाग की टीम यह साबित नहीं कर पाई थी की यह हिंसक जंगली जानवर वास्तव में बाघ ही है। लेकिन जिन ग्रामीणों ने उसे देखा था। वह सब बार-बार टीम को चीता होने का भरोसा देकर उसकी उपस्थित बता रहे थे।
आज इसी जंगली जानवर को चीते के रूप में साफ तौर पर कायमगंज क्षेत्र के गांव अरियारा में देखा गया। हिम्मत करके ग्रामीणों ने सावधानीपूर्वक अपने मोबाइल फोन से उसका फोटो भी लिया। उसके अनुसार चीता गांव के पास स्थित घने आम के एक बाग में पेड़ की मोटी तथा फैली हुई शाखा पर लेटा हुआ साफ-साफ दिखाई दे रहा था। ग्रामीणों के अनुसार इस बाघ की चहल कदमी पिछले कई दिनों से महसूस की जा रही थी। लेकिन आज तो वह जमीन से कुछ ही दूरी पर जहां छलांग लगाकर या फिर अपने पंजे खड़ा कर आसानी से बाघ पहुंच सकता है। ऐसी डाल पर ही लेटा हुआ आराम करता दिखाई दिया।
गांव के पास आम के बाग में डाल पर लेटे चीते की खबर फैलते ही सतर्क हुए ग्रामीण वहां पहुंचे। उनकी उपस्थिति की आहट पाते ही आम की डाल से छलांग लगाकर चीता वही घने आम के बागों में कहीं जाकर छुप गया। एक बार फिर ग्रामीणों द्वारा बाघ का लिया गया फोटो भेज कर वन विभाग की टीम को सूचित किया। किंतु समाचार लिखे जाने तक टीम गांव नहीं पहुंची थी। बाघ के होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि इस समय खेतों में गेहूं की कटाई तथा मड़ाई का काम रात दिन किसान को करना पड़ रहा है। जिससे उन्हें कभी भी खतरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जल्द से जल्द बाघ को पकड़ कर किसी सुरक्षित अभयारण्य में भेजा जाना चाहिए।
चन्द्रपाल
