गोरखपुर हि.स.। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खाद कारखाने का लोकार्पण करने के साथ ही गोरखपुर अपनी एक और उपलब्धि के लिए विश्व में जाना जाएगा। यह उपलब्धि है विश्व का सबसे ऊंचा प्रिलिंग टावर होने की गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिंलिग टावर विश्व के सबसे ऊंचे पाकिस्तान के दहरकी में स्थित 125 मीटर ऊंचे प्रिलिंग टावर से भी ऊंचा होगा। इसकी ऊंचाई 149.5 मीटर होगी।
एचयूआरएल के वरिष्ठ प्रबंधक सुबोध दीक्षित ने बताया कि प्राकृतिक गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाता है। अमोनिया के लिक्विड को प्रिलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाता है, जिसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम है। अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया के छोटे-छोटे दाने प्रिलिंग टॉवर के बेसमेंट में बने छिद्रों से बाहर आते हैं। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाया जाता है। नीम कोटिंग होने के बाद उसे पैक किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रिलिंग टॉवर में यूरिया निर्माण से संबंधित तरल पदार्थों को दूसरे यूनिट से पाइपलाइन के माध्यम से लाकर ऊंचाई से गिराया जाएगा। इसके बाद वह धीरे-धीरे नीचे आते हुए टॉवर के अंदर के तापमान की वजह से छोटे-छोटे दानों में बदल जाएगा।
आठ हजार करोड़ से अधिक लागत वाला यह कारखाना प्राकृतिक गैस से संचालित होगा, जिससे वातावरण के प्रदूषित होने का खतरा नहीं है। 500 मीट्रिक टन यूरिया भी तैयार की गई। कारखाने से रोजाना 3850 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। यूरिया प्लांट में टॉवर की ऊंचाई हवा की औसत रफ्तार के आधार पर तय की जाती है। इसके लिए एचयूआरएल की टीम ने करीब महीने भर हवा की रफ्तार के बारे में सर्वे किया था।यूरिया के दानों के लिए देश में जो मानक तय हैं उसके मुताबिक, यूरिया के दाने 0.3 एमएम से अधिक नहीं होने चाहिए। गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टॉवर ऊंचा होने की वजह से इसमें 0.2 एमएम के दाने बनेंगे। दानों का आकार छोटा होने से वे मिट्टी में जल्दी घुलेंगे और उसका असर जल्द होगा।
