– संस्कृत वांगमय को हिन्दी और अंग्रेजी में रूपांतरित कर सदैव आम लोगों का खयाल रखा
वाराणसी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.सम्पूर्णानन्द की 132वीं जयंती शनिवार को मनाई गई। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केन्द्र में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री की जयंती ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि डॉ.सम्पूर्णानंद परम्परा और धर्म के आस्थावान नक्षत्र थे। उनके बहुमुखी व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम नयी पीढ़ी के लिये एक प्रेरणादायक पथ सिद्ध होगा।
कुलपति ने कहा कि उनके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुये भाषा के नाम पर इस विवि का जन्म वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में हुआ। वे सन्त पुरुष थे और सदैव राष्ट्र के प्रति समर्पित रहे। डॉ.सम्पूर्णानन्द के व्यक्तित्व-कृतित्व पर विवि से पुस्तकों का प्रकाशन भी किया जायेगा। उनके जीवन कृत्य पर एक मासिक संगोष्ठी भी आयोजित होगी।
संगोष्ठी में प्रो.राम पूजन पान्डेय ने कहा कि डॉ.सम्पूर्णानंद एक सन्त,ऋषि एवं महात्मा के रुप में जाने जाते थे। उन्होंने सदैव संस्कृत,संस्कृति एवं संस्कार के संगम का प्रवाह कर भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर लाने का प्रयास किया।
प्रो.जितेन्द्र कुमार ने कहा कि उनके दर्शन को एक विषय के रूप मे भी अध्ययन और अध्यापन करने की आवश्यकता है। उन पर शोध करना श्रेयकर सिद्ध होगा। गोष्ठी में प्रो.शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि डॉ सम्पूर्णानन्द ने संस्कृत वांगमय को हिन्दी और अंग्रेजी में रूपांतरित कर सदैव आम लोगों का खयाल रखा। जिसके लिये यह कहा जाय कि वे भारतीय ज्ञान संस्कृति को आधार बनाकर आगे बढ़ाना ही उनकी कुशल दृष्टि थी।
संगोष्ठी में सम्पूर्णानन्द के प्रपौत्र मृगांक शेखरानंद ने कहा कि आज उनके प्रकाश से सभी प्रकाशित हैं,उनके आदर्श व्यक्तित्व कृतित्व को स्वीकार कर अपने जीवन में उतारने से जयंती का वास्तविक स्वरुप सिद्ध होगा। संगोष्ठी में विवि के कुलसचिव डॉ ओमप्रकाश ने भी विचार रखा।
गोष्ठी का संचालन प्रो.सुधाकर मिश्र, स्वागत प्रो.राम पूजन पान्डेय,धन्यवाद ज्ञापन छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो.हरिशंकर पान्डेय ने किया। इसके पहले कुलपति के अगुवाई में अतिथियों ने परिसर में स्थित डॉ सम्पूर्णानंद के मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
श्रीधर
