Friday, April 24, 2026
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गोण्डा समेत उप्र के 29 जिलों में चलेगा क्षय रोग उन्मूलन अभियान

मुख्यमंत्री एक नवम्बर को शुरू करेंगे सघन टीबी रोगी खोज अभियान

लाक़डाउन में भी मरीजों का रखा गया पूरा ख्याल, फोन पर भी जाना हाल

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग यानि टीबी उन्मूलन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को समय से पहले पूरा करने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह गंभीर है। इस संकल्प को सही मायने में धरातल पर उतारने को लेकर नए कार्यक्रम शुरू करने के साथ ही पहले से चल रहे कार्यक्रमों में और तेजी लायी जा रही है। टीबी उन्मूलन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों और योजनाओं के बारे में बुधवार को प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने विस्तार से मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौरान टीबी मरीजों की खोज और पहचान के लिए चलाये जा रहे अभियान पर भी असर पड़ना स्वाभाविक था, लेकिन आगामी एक नवम्बर से प्रदेश के 29 जिलों में एक बार फिर सघन टीबी रोगी खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री एक नवम्बर को लखनऊ से इस अभियान का शुभारम्भ करेंगे। दस दिन तक चलने वाले इस अभियान के दौरान घर-घर जाकर टीम लोगों की स्क्रीनिंग करेगी और जिनमें लक्षण नजर आयेंगे उनके बलगम की जांच करायी जाएगी। उन्होंने टीबी के अलावा दस्तक अभियान और टीकाकरण अभियान के बारे में भी विस्तार से बताया।

इन जिलों में चलेगा अभियान :

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 29 जनपदों अम्बेडकर नगर, अमेठी, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, गोण्डा, गोरखपुर, हमीरपुर, जालौन, जौनपुर, कुशीनगर, महराजगंज, महोबा, मऊ, पीलीभीत, संत रविदास नगर, शाहजहांपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, संत कबीर नगर एवं लखनऊ में एक नम्बर से 11 नवम्बर के बीच दस दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मलिक आलमगीर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में द्वितीय चरण का एक्टिव केस फाइंडिंग कार्यक्रम (एसीएफ) दो नवम्बर 2020 से 11 नवम्बर 2020 तक कुल दस दिवसों में जनपद के पंद्रह अलग-अलग क्षेत्रों में चलाया जायेगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को जनपद में शत-प्रतिशत सफल बनाने हेतु क्षय रोग विभाग के समस्त कर्मचारियों को गत 28 अक्टूबर को प्रशिक्षित किया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लाक़ डाउन के दौरान नेपाल से आये एक रोगी, अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश आये 443 क्षय रोगियों और प्रदेश के 649 उन मरीजों को जो अन्य जिलों में पहुंचे थे, उनको समय से क्षय निरोधी औषधि मुहैया कराई गयी। इस दौरान प्रदेश के क्षय रोगियों से दूरभाष के जरिये संपर्क कर दवा उपलब्ध करायी गयी।

निक्षय पोषण योजना बनी मददगार :

टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रूपये प्रतिमाह दिए जाने के लिए अप्रैल 2018 में लायी गयी निक्षय पोषण योजना बड़ी मददगार साबित हुई है। योजना के तहत प्रदेश में अब तक 162 करोड़ रुपये की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तातंरण के माध्यम से क्षय रोगियों को प्रदान की जा चुकी है। इसमें वर्ष 2018 में 66 करोड़ रुपये, वर्ष 2019 में 72 करोड़ रूपये और जनवरी 2020 से अब तक 21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाता है। जिन क्षय रोगियों का बैंक खाता नहीं है, उनका खाता इन्डियन पोस्टल पेमेंट्स बैंक द्वारा मरीजों के घर जाकर खोला जा रहा है। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि टीबी और कोविड के लक्षण मिलते-जुलते हैं, इसलिए ऐसे में खास सावधानी बरतने की जरूरत है। इस तरह के लक्षण वालों की कोविड की जांच के साथ टीबी की भी जांच करायी जा रही है। इससे बचने के लिए जरूरी प्रोटोकाल जैसे मास्क पहनना अनिवार्य है, क्योंकि इन दोनों ही बीमारियों में खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों से संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए अपने साथ दूसरों को सुरक्षित करने के लिए मास्क से मुंह और नाक को ढककर रखें।

राज्यपाल की पहल लायी रंग :

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा 18 साल से कम उम्र के उपचाराधीन बच्चों को गोद लेने की अपील रंग लायी है और आज प्रदेश में राजभवन, विभिन्न संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा करीब 12,000 बच्चों को गोद लिया गया है। इसके चलते इन बच्चों को बेहतर इलाज, देखभाल और पुष्टाहार के साथ परिजनों को भावनात्मक एवं सामाजिक सहयोग भी मिल रहा है। इस मौके पर राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा कि महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारी पूरी सक्रियता से निभाती हैं, वह टीबी के लक्षणों आदि के बारे में जानकारी रखें और परिवार में किसी में भी इस तरह के लक्षण नजर आएं तो उनकी जांच अवश्य कराएं। उन्होंने टीबी के लक्षणों और विभागीय कार्यों के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि यह बीमारी आमतौर पर फेफड़ों के साथ ही शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित करती है। दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी व बुखार आना, भूख न लगना, वजन घटना, छाती में दर्द और कमजोरी टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि टीबी से आज भी पूरे विश्व में करीब 14 लाख लोग हर साल मरते हैं, उनमें से 4.8 लाख मरीजों की मौत भारत में होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 145 सीबीनाट मशीन स्थापित होने से गुणवत्तापूर्ण जांच में तेजी आई है। भारत सरकार द्वारा 458 ट्रू नाट मशीन और 41 डिजिटल एक्स-रे मशीन उपलब्ध करायी जानी है। इसके अलावा मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एम.डी.आर.) क्षय रोगियों की मुफ्त जांच के लिए कल्चर एंड डी.एस.टी. लैब प्रयागराज, इटावा, झाँसी व कानपुर नगर में भी स्थापित की जा रही है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. (मेजर) डीएस नेगी ने मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में मदद की अपील की। कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के अलावा सेंटर फॉर एडवोकेसी (सीफार) और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजी (जीएचएस) के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों से 400 प्रतिभागी (मीडिया प्रतिनिधि और क्षय रोग विभाग के अधिकारी) कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े रहे।

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