Saturday, April 25, 2026
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UP News : नौकरी दो या डिग्री वापस लो अभियान: एनएसयूआई 12 मार्च को संसद का करेगी घेराव

– देश में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे अधिक: नीरज कुन्दन

लखनऊ (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुन्दन रविवार को यहां राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘नौकरी दो या डिग्री वापस लो’ छात्र महासम्मेलन में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि एनएसयूआई ‘नौकरी दो या डिग्री वापस लो’ के तहत आगामी 12 मार्च को दिल्ली में संसद का घेराव करेगी।
उन्होंने कहा कि छात्र अपने मन की बात सुनना चाहता है, दूसरे के मन की बात सुनना नहीं चाहता। एनएसयूआई छात्र हितों के लिए लगातार सड़कों पर संघर्ष करती है। उन्होंने काशी विद्यापीठ के छात्र संघ चुनाव के आये रिजल्ट पर कहा कि इससे यह साफ हो गया है कि कांग्रेस की नीतियां छात्रों और युवाओं की पसन्द है। 
नीरज कुन्दन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भर्तियां नहीं हो रहीं, जो भर्ती निकल रही है वह सब घोटाले की भेंट चढ़ रहीं हैं। प्रदेश में लगातार युवाओं और छात्रों के हितों को कुचलने का काम भाजपा की सरकार कर रही है। इसके विरोध में पूरे प्रदेश के छात्र लामबन्द हो रहे हैं। 
उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे अधिक है। भाजपा ने 2014 में हर साल दो करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया था और अब, यह आंकड़ा 12 करोड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव में एनएसयूआई पूरी ताकत के साथ कांग्रेस पार्टी को सत्ता में पहुंचाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेगी। 
राष्ट्रीय महासचिव शौर्यवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुन्दन के आह्वान पर चलाये जा रहे ‘नौकरी दो या डिग्री वापस लो’ के तहत आगामी 12 मार्च 2021 को भारी संख्या में उप्र से छात्र एवं युवा दिल्ली पहुंचे। 
कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह ने छात्रों और युवाओं को छात्र हितों को लेकर, बेरोजगारी के मुद्दे पर और अधिक आक्राकमता के साथ सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार आज छात्रों और युवाओं पर तानाशाही रवैया अपना रही है।
उप्र प्रदेश अध्यक्ष अनस रहमान ने कहा कि एनएसयूआई ने केन्द्र सरकार के खिलाफ नौकरी दो या डिग्री वापस लो अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकार की असलियत की ओर इशारा करना है, जिसे युवाओं को रोजगार देने में कोई दिलचस्पी नहीं है। छात्र और युवा दर-दर भटकने के लिए मजबूर हैं।

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