Sunday, February 8, 2026
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लखनऊ रेप केस का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

ढाई साल की मासूम से दीपक वर्मा ने किया था हैवानियत

आज तड़के पुलिस मुठभेड़ में मारा गया लखनऊ रेप केस का आरोपी

प्रादेशिक डेस्क

लखनऊ। लखनऊ रेप केस ने उत्तर प्रदेश की राजधानी को झकझोर कर रख दिया। ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी दीपक वर्मा को शुक्रवार तड़के थाना आलमबाग पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। यह जघन्य अपराध बुधवार को चंद्रनगर मेट्रो स्टेशन के नीचे हुआ, जिसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर आरोपी को ढेर कर दिया। पीड़िता की हालत गंभीर बनी हुई है, और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है।

लखनऊ रेप केस की शुरुआतः मासूम पर अत्याचार
लखनऊ रेप केस की शुरुआत बुधवार देर रात चंद्रनगर मेट्रो स्टेशन के नीचे हुई। एक गरीब परिवार अपनी ढाई साल की बच्ची के साथ फुटपाथ पर सो रहा था। इसी दौरान दीपक वर्मा, जो रेलवे स्टेशन पर पानी बेचने और जागरण में झांकियां सजाने का काम करता था, ने मौके का फायदा उठाया। उसने बच्ची को अगवा कर मेट्रो स्टेशन की लिफ्ट के पास ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की चीखें सुनकर आसपास के लोग जागे और उसके माता-पिता को सूचित किया।

परिवार ने तुरंत बच्ची को लोकबंधु अस्पताल पहुंचाया, जहाँ उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) रेफर किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के निजी अंगों में गंभीर चोटें हैं, और उसका इलाज गहन चिकित्सा इकाई में चल रहा है। लखनऊ रेप केस ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी, और लोग इस क्रूरता के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाईः सीसीटीवी से हुई पहचान
लखनऊ रेप केस की सूचना मिलते ही आलमबाग थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने चंद्रनगर मेट्रो स्टेशन और आसपास के 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जाँच की। फुटेज में दीपक वर्मा बच्ची को ले जाते और अपनी सफेद स्कूटी पर सवार दिखा। पुलिस ने स्कूटी का नंबर ट्रैक कर दीपक की पहचान ऐशबाग के डूडा कॉलोनी निवासी के रूप में की।

पुलिस ने दीपक वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पाँच विशेष टीमें गठित कीं और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया। डीसीपी सेंट्रल आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में दीपक की गतिविधियाँ स्पष्ट थीं। उसने वारदात से पहले मेट्रो स्टेशन की कई बार रेकी की थी। लखनऊ रेप केस में यह तकनीकी सबूत पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

मुठभेड़ में दीपक ढेरः लखनऊ रेप केस में न्याय
गुरुवार देर रात, पुलिस को सूचना मिली कि दीपक वर्मा आलमबाग के मवैया क्षेत्र में छिपा है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और दीपक को सरेंडर करने को कहा। पुलिस के अनुसार, दीपक ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहाँ शुक्रवार तड़के 3ः45 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

लखनऊ रेप केस में पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने बच्ची के परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। डीसीपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि दीपक के खिलाफ हजरतगंज थाने में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज था। इस मुठभेड़ ने पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत किया।

स्थानीय आक्रोश और सामाजिक प्रतिक्रिया
लखनऊ रेप केस ने स्थानीय लोगों में गुस्से की लहर पैदा की। चंद्रनगर और आलमबाग के निवासियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस जघन्य अपराध के खिलाफ आवाज उठाई। कई लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन कुछ ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं।

पुलिस ने स्थानीय लोगों को शांत करने और पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान करने का प्रयास किया। बच्ची के माता-पिता, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, को पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

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लखनऊ रेप केसः सुरक्षा पर सवाल
लखनऊ रेप केस ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2025 में आलमबाग बस अड्डे के पास एक अन्य दुष्कर्म की घटना ने भी सुर्खियाँ बटोरी थीं। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन अब माँग कर रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए और रात में गश्त को और सख्त किया जाए।

पुलिस ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया है। आलमबाग और चंद्रनगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की योजना है। लखनऊ रेप केस ने यह भी दिखाया कि तकनीक, जैसे सीसीटीवी, अपराधियों को पकड़ने में कितनी प्रभावी हो सकती है।

लखनऊ रेप केस में पुलिस की सख्ती
लखनऊ रेप केस में पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई ने एक मजबूत संदेश दिया है कि अपराधियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। दीपक वर्मा जैसे हैवान को 24 घंटे के भीतर सजा मिली, लेकिन बच्ची की नाजुक हालत अभी भी चिंता का विषय है। समाज को इस घटना से सबक लेते हुए बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए और जागरूक होने की जरूरत है।

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