Wednesday, January 14, 2026
Homeराज्यभूमि घोटाला : दो IAS समेत 10 अधिकारी निलंबित

भूमि घोटाला : दो IAS समेत 10 अधिकारी निलंबित

54 करोड़ के संदिग्ध भूमि घोटाला पर धामी सरकार का ’सर्जिकल स्ट्राइक’!

राज्य डेस्क

देहरादून। हरिद्वार भूमि घोटाला उत्तराखंड के दो आईएएस समेत 10 अधिकारियों के गले का फांस बन गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भूमि घोटाले पर कड़ा प्रहार करते हुए 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब ग्राम सराय में स्थित 2.3070 हेक्टेयर अनुपयुक्त भूमि को ₹54 करोड़ में खरीदे जाने की जानकारी सामने आई। यह भूमि कूड़े के ढेर के पास स्थित थी, जिससे इसकी वास्तविक कीमत बहुत कम आंकी गई थी।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेशः पद नहीं, जवाबदेही महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “हमारी सरकार ने पहले ही दिन से स्पष्ट कर दिया है कि लोकसेवा में ’पद’ नहीं बल्कि ’कर्तव्य’ और ’जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं। चाहे व्यक्ति कितना भी वरिष्ठ हो, अगर वह जनहित और नियमों की अवहेलना करेगा, तो कार्रवाई निश्चित है।“ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त नई कार्य संस्कृति विकसित की जाएगी। हरिद्वार भूमि घोटाला के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाही अमल में लाई जाएगी।

निलंबित अधिकारियों की सूची
हरिद्वार भूमि घोटाला में निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैंः कर्मेंद्र सिंह तत्कालीन प्रशासक, नगर निगम हरिद्वार और वर्तमान जिलाधिकारी, वरुण चौधरी तत्कालीन नगर आयुक्त, अजयवीर सिंह तत्कालीन उपजिलाधिकारी, निकिता बिष्ट वरिष्ठ वित्त अधिकारी, विक्की वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक, राजेश कुमार रजिस्ट्रार कानूनगो, कमलदास मुख्य प्रशासनिक अधिकारी। इसके अलावा, हरिद्वार भूमि घोटाला में पहले ही तीन अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं और दो की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, जिससे कुल निलंबित अधिकारियों की संख्या 10 हो गई है।

यह भी पढ़ें: IRS अधिकारी योगेंद्र मिश्रा सस्पेंड

जांच और आगे की कार्रवाई
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने हरिद्वार भूमि घोटाला में सभी निलंबित अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, संबंधित भूमि सौदों को रद्द करने और भूमि मालिकों से धन की वसूली के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान किए गए सभी कार्यों का विशेष ऑडिट भी शुरू किया गया है।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
ग्राम सराय के स्थानीय निवासियों ने इस भूमि खरीद को लेकर आश्चर्य और नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में स्थित भूमि की वास्तविक कीमत बहुत कम है और यह कूड़े के ढेर के पास स्थित है, जिससे इसकी उपयोगिता सीमित है। इससे पहले, स्थानीय लोग इस भूमि को बेचने में असमर्थ थे, लेकिन नगर निगम द्वारा इसे ₹54 करोड़ में खरीदे जाने से संदेह उत्पन्न हुआ है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति
पिछले तीन वर्षों में, उत्तराखंड सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 150 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सरकारी कर्मचारी और माफिया शामिल हैं। यह कार्रवाई सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें: दहेज हत्यारोपी पिता पुत्र को आजीवन कारावास!

RELATED ARTICLES

Most Popular