Wednesday, January 14, 2026
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गोंडा की गीता गोष्ठी में जुटेंगे राष्ट्रीय विद्वान

रजत जयंती समारोह में दिखेगी आध्यात्मिक आभा!

पिछले 24 वर्षों से गोंडा में निरंतर मनाई जा रही है गीता गोष्ठी

संवाददाता

गोंडा। गोंडा की प्रसिद्ध गीता गोष्ठी इस वर्ष रजत जयंती महोत्सव के रूप में मनाई जाएगी। रामलीला मैदान स्थित रामेश्वरम मंदिर में आयोजित बैठक में गोष्ठी के सदस्यों ने ऐलान किया कि आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक रूप देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के गीता विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। समारोह में प्रवचनों से लेकर प्रतियोगिताओं तक, एक आध्यात्मिक उत्सव का पूर्ण दृश्य उपस्थित होगा।

गीता गोष्ठी: ढाई दशक से सतत साधना
बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोष्ठी के संस्थापक एवं संयोजक इं. सुरेश दूबे ने बताया कि वर्ष 2000 ई. में नगर के दर्जन भर युवाओं ने मिलकर हर रविवार को गीता गोष्ठी का आयोजन आरंभ किया था। तब से यह गीता गोष्ठी सतत रूप से जारी है और इस वर्ष इसकी 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

विद्वानों की होगी दिव्य उपस्थिति
रजत जयंती समारोह को स्मरणीय और प्रेरणास्पद बनाने के लिए देश के विख्यात गीता विद्वानों, मनीषियों और धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। वे गीता के तात्विक रहस्यों और जीवन के धार्मिक सिद्धांतों पर प्रवचन करेंगे, जिससे जनमानस को गीता की सारगर्भित शिक्षाओं से लाभ होगा।

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बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं, युवाओं के लिए प्रेरणा
समारोह के दौरान शास्त्रीय संगीत, गीता प्रश्नोत्तरी, और सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। ये कार्यक्रम न केवल बच्चों में ज्ञान और संस्कृति के बीज रोपित करेंगे, बल्कि युवाओं को भी आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करेंगे।

आयोजन की रूपरेखा बनी, सुझाव आमंत्रित
गोष्ठी के एक अन्य संस्थापक जनार्दन सिंह ने रजत जयंती महोत्सव की संभावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रूपरेखा साझा की और सदस्यों से रचनात्मक सुझाव मांगे। सभी की सम्मिलित सहभागिता से यह आयोजन उल्लेखनीय और अनुकरणीय बनने की ओर अग्रसर है।

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आयोजन समिति की सक्रियता
गोष्ठी आयोजन समिति की बैठक में शामिल प्रमुख सदस्यों में उत्तम कुमार शुक्ल, श्रीराम अवस्थी, अनिल सिंह, अशोक कुमार जायसवाल, गंगाराम शुक्ल, जोगेंद्र प्रसाद दूबे, छेदीलाल सैनी, अशोक कुमार सिन्हा, उमानाथ त्रिपाठी, नारायण प्रसाद पाण्डेय, रामकरन मिश्र, रमेश दूबे, धीरेन्द्र पाण्डेय, चन्द्रभाल पाण्डेय और आर जे शुक्ल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

संस्कृति और साधना का संगम बनेगा गोंडा
गोंडा की यह गीता गोष्ठी न केवल धार्मिक चेतना का केंद्र बनी है, बल्कि समाज निर्माण और मानव मूल्य सृजन की दृष्टि से भी इसका विशेष योगदान रहा है। रजत जयंती महोत्सव एक ऐसा मंच बनेगा, जहां आध्यात्मिकता, संस्कृति और शिक्षा का संगम देखने को मिलेगा।

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