राजस्थान के दौसा जिले के आश्रम में बाबा बनकर रह रहा था ‘डॉक्टर डेथ’
‘डॉक्टर डेथ’ की 125 किडनी ट्रांसप्लांट साजिश और हत्या का खौफनाक इतिहास हुआ उजागर
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ‘डॉक्टर डेथ’ के रूप में चर्चित एक ऐसे अपराधी को राजस्थान के दौसा से दबोचा है, जिसकी क्रूरता की कहानियां अब तक अफवाह लगती थीं। यह व्यक्ति और कोई नहीं, बल्कि वही है, जिसने न सिर्फ 100 से अधिक हत्याएं कीं, बल्कि अवैध रूप से 125 किडनी ट्रांसप्लांट भी कराए! 67 वर्षीय देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया, जब वह बाबा के वेश में दौसा के एक आश्रम में छिपकर रह रहा था। वह पहले भी पैरोल लेकर फरार हो चुका था, और इस बार भी पिछले साल जून से गायब था। पुलिस ने इस गिरफ्तारी को ’बड़ी सफलता’ बताया है।
पैरोल तोड़कर छिपा बैठा था बाबा बनकर
डॉक्टर डेथ को 9 जून 2023 को दो महीने की पैरोल मिली थी। उसे 3 अगस्त को जेल में सरेंडर करना था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद वह राजस्थान के दौसा में स्थित एक आश्रम में बाबा के भेष में रहने लगा। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को जब उसकी लोकेशन की जानकारी मिली, तो इंस्पेक्टर राकेश कुमार और अनुज कुमार के नेतृत्व में एक टीम को दौसा भेजा गया। लोकेशन कन्फर्म होने के बाद उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया गया।
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पहले भी तोड़ चुका है पैरोल
इससे पहले 2020 में भी डॉक्टर डेथ पैरोल पर बाहर आया था और गायब हो गया था। छह महीने तक पुलिस उसे तलाशती रही और अंततः उसे पकड़ कर जेल भेजा गया था। इस बार भी उसकी गिरफ्तारी में लगभग छह महीने लग गए। टीमों ने अलीगढ़, जयपुर, आगरा, प्रयागराज और दिल्ली तक खाक छानी। अंततः दौसा से उसे गिरफ्तार किया गया।

सीरियल किलिंग और किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड
डॉक्टर डेथ वर्ष 1995 से 2004 तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा। उसने किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध रैकेट में डॉ. अमित के साथ मिलकर काम किया। वर्ष 1998 से 2004 के बीच इन दोनों ने 125 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए। डॉक्टर डेथ बिहार, बंगाल और नेपाल से गरीब लोगों को झांसे में लेकर डोनर बनाता और उन्हें डॉ. अमित के पास ले जाता। एक डोनर पर 5 से 7 लाख रुपये लिए जाते थे।
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हत्या के मामलों में सात बार उम्रकैद, एक बार फांसी
अब तक देवेंद्र शर्मा पर 21 हत्याओं में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। दिल्ली के सात मामलों में उसे उम्रकैद की सजा हो चुकी है और गुरुग्राम के एक मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। पुलिस पूछताछ में उसने कबूला कि वह 50 हत्या तक गिन रहा था, इसके बाद उसे गिनती ही याद नहीं रही।
‘मौतखाना’ था उसका अस्पताल
राजस्थान के दौसा में डॉक्टर डेथ ने 1984 में बीएएमएस की पढ़ाई पूरी कर जनता क्लीनिक नाम से अस्पताल खोला था। करीब 11 वर्षों तक सामान्य डॉक्टर की तरह काम करता रहा, लेकिन फिर 11 लाख की ठगी ने उसका जीवन मोड़ दिया। इसके बाद उसने अपराध का रास्ता चुन लिया। शुरुआत में फर्जी गैस एजेंसी बनाकर ठगी करता था। बाद में ट्रक और टैक्सी चालकों को शिकार बनाना शुरू किया।
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हत्या के बाद शवों को मगरमच्छों को खिलाता था
उसका तरीका बेहद भयावह था। वह ट्रक या टैक्सी बुक करता, ड्राइवर की हत्या करता और शवों को कासगंज की हजारा नहर में फेंक देता, जहां मगरमच्छ बड़ी संख्या में मौजूद थे। शव कभी बरामद नहीं हुए। पुलिस को 2004 में गिरफ्तारी के बाद नहर से कोई शव नहीं मिला था। यह खुलासा डॉक्टर डेथ ने खुद पूछताछ के दौरान किया।
डॉक्टर डेथ की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी
डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि डॉक्टर डेथ की तलाश एक लंबे समय से जारी थी। पैरोल जम्प करने वालों की लिस्ट में उसका नाम भी सबसे ऊपर था। दिल्ली पुलिस की यह गिरफ्तारी न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से जरूरी थी, बल्कि उन सैकड़ों पीड़ित परिवारों को भी न्याय दिलाने का एक प्रयास है।

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