Wednesday, January 14, 2026
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भारत माता की तस्वीर को लेकर मचा बवाल!

केरल में पर्यावरण दिवस कार्यक्रम को लेकर मचा सियासी हंगामा, राजभवन का कार्यक्रम स्थगित

राज्य डेस्क

तिरुअनंतपुरम्। भारत माता की तस्वीर को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद राजभवन में आयोजित होने वाला विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। यह विवाद उस समय भड़क उठा जब राजभवन की ओर से कार्यक्रम स्थल पर ’भारत माता’ की तस्वीर लगाने और उस पर पुष्प अर्पित करने की शर्त रखी गई। इस तस्वीर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से जोड़ा गया, जिस पर राज्य सरकार के कृषि विभाग ने कड़ा विरोध जताया। इसके परिणामस्वरूप यह कार्यक्रम राजभवन से हटाकर सचिवालय के दरबार हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया।

भारत माता की तस्वीर लगाने की मांग बनी विवाद की जड़
विश्व पर्यावरण दिवस जैसे गैर-राजनीतिक आयोजन में भारत माता की तस्वीर के सम्मिलन को लेकर केरल में राजनीति गर्मा गई है। बुधवार शाम को राजभवन की ओर से कार्यक्रम में ’भारत माता’ की तस्वीर रखने और उस पर पुष्प अर्पण करने का निर्देश भेजा गया। यह निर्देश अंतिम क्षणों में आने से कृषि विभाग को असहज स्थिति में डाल गया। कृषि मंत्री पी. प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत माता की तस्वीर आरएसएस से जुड़ी प्रतीकों में गिनी जाती है और इसे सरकारी कार्यक्रम में शामिल करना संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे का उल्लंघन है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत माता का सम्मान देश का हर नागरिक करता है, लेकिन किसी एक विचारधारा से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर का इस्तेमाल संवैधानिक मर्यादा के विरुद्ध है। इसलिए राजभवन में प्रस्तावित कार्यक्रम को वहां से हटाकर राज्य सचिवालय में स्थानांतरित करना पड़ा।

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संवैधानिक दायित्वों पर उठा प्रश्न
भारत माता के नाम पर खड़े हुए इस विवाद ने एक संवैधानिक प्रश्न को जन्म दिया है-क्या राजभवन जैसे निष्पक्ष संवैधानिक कार्यालय में किसी एक विचारधारा की तस्वीर या प्रतीक को आधिकारिक रूप से स्थान दिया जा सकता है? कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शुरू से ही कार्यक्रम में सहयोग किया था, लेकिन आखिरी वक्त में कार्यक्रम में एक वैचारिक रंग देने की कोशिश की गई।

मंत्री प्रसाद ने साफ किया कि यह निर्णय सरकार के उस रुख को दर्शाता है, जो संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि अगर ऐसी तस्वीरों को स्वीकार किया गया तो भविष्य में अन्य संगठनों की मांगें भी इसी आधार पर उठेंगी, जिससे राजकीय आयोजनों की निष्पक्षता खतरे में पड़ जाएगी।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
इस विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने कहा कि ’भारत माता’ देश की भावनाओं का प्रतीक है और उससे परहेज करना देशविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय अस्मिता और प्रतीकों का अपमान है। भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्णय सरकार की ’हिंदू विरोधी’ मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राष्ट्रगान और तिरंगे के सम्मान की बात आती है, तो ’भारत माता’ की तस्वीर से परहेज क्यों?

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सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
भारत माता विवाद ने सोशल मीडिया पर भी गर्म बहस छेड़ दी है। एक पक्ष जहां केरल सरकार के निर्णय को धर्मनिरपेक्षता की रक्षा बताकर समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे राष्ट्रविरोधी करार दे रहा है। ट्विटर और फेसबुक पर üभारत-माता-का-अपमान और üब्वदेजपजनजपवदथ्पतेज जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर भारत माता की तस्वीर किसी संगठन की बपौती नहीं है, तो फिर उस पर आपत्ति क्यों? वहीं, अन्य ने राज्य सरकार के स्टैंड को तर्कसंगत ठहराते हुए कहा कि किसी सरकारी आयोजन को किसी विचारधारा विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

प्रतीकों की राजनीति या संवैधानिक मर्यादा का सवाल?
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों का उपयोग कब वैध है और कब वैचारिक थोप का रूप ले लेता है। भारत माता की तस्वीर को लेकर उपजे विवाद ने संविधान और विचारधारा के बीच संतुलन को केंद्र में ला दिया है। राजभवन और राज्य सरकार के इस टकराव ने देश में प्रतीकों की राजनीति को लेकर गंभीर चिंतन की जरूरत को रेखांकित किया है। भारत माता जैसी सार्वभौमिक भावना को किसी एक दल या विचारधारा की सीमाओं में बांधना सही नहीं, लेकिन इसे लेकर संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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