नारी चेतना, न्यायप्रियता और सामाजिक समरसता की प्रतीक थीं अहिल्याबाई होलकर
अम्बुज भार्गव
बलरामपुर। जनपद के नगर पंचायत पचपेड़वा और गैसड़ी में शुक्रवार को आयोजित भव्य कार्यक्रमों में समाज सुधारिका अहिल्याबाई होलकर के त्रिशताब्दी जन्मोत्सव पर उन्हें कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ याद किया गया। नगरवासियों ने एक स्वर में उनकी नारी चेतना, न्यायप्रियता और सामाजिक समरसता के योगदान को अभूतपूर्व बताया।
कार्यक्रमों में भारी संख्या में जनसमुदाय की भागीदारी दिखी। इन आयोजनों में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह गुड्डू, विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला महामंत्री डॉ. अजय सिंह पिंकू और भाजपा जिला उपाध्यक्ष आद्या सिंह मौजूद रहे। वक्ताओं ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन को वर्तमान समाज के लिए एक दिशासूचक बताया।
साथ ही, पिंकी सिंह और रीता शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में नारी सशक्तिकरण पर उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। पचपेड़वा के अध्यक्ष रवि वर्मा और गैसड़ी के अध्यक्ष प्रिंस वर्मा ने नगरवासियों से अहिल्याबाई होलकर के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि 18वीं सदी की इस दूरदर्शी महिला ने शासन में न केवल नारी नेतृत्व की मिसाल कायम की, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और जनहित में निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता भी प्रदर्शित की। अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनवाए गए अनेक मंदिर और धर्मशालाएं आज भी उनकी सेवा भावना का प्रतीक हैं।
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सभा में मौजूद जिला उपाध्यक्ष दयाराम प्रजापति, मयूर सूर्यवंशी, सुरेश कुमार सिंह शेरा, पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेंद्र ओझा, राम केवल यादव, इंद्रजीत साहू और राम विलास विश्वकर्मा समेत सैकड़ों लोगों ने अहिल्याबाई होलकर को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज विविध चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में अहिल्याबाई होलकर के सिद्धांतों पर चलना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने न्याय और धर्म के बीच संतुलन बनाकर समाज में आदर्श स्थापित किया।
नारी नेतृत्व की जिस मिसाल की आज आवश्यकता है, वह त्रिशताब्दी पूर्व एक महिला ने बिना किसी आधुनिक सुविधा या समर्थन के प्रस्तुत कर दी थी। उनकी नीतियां और कार्यशैली आज भी शासन और प्रशासनिक पाठ्यक्रमों में स्थान रखती हैं। पचपेड़वा और गैसड़ी में आयोजित इन कार्यक्रमों ने स्थानीय जनता में ऐतिहासिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित कर दिया। जनसामान्य का उत्साह देखते ही बन रहा था। लोग अपने पारंपरिक वस्त्रों में, हाथों में पुष्प लिए कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चांडी गांव में हुआ था। वे मराठा साम्राज्य के होलकर वंश की शासिका बनीं। उनकी न्यायप्रियता, निर्भीक निर्णय लेने की क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय इतिहास में अमर कर दिया। बलरामपुर में पहली बार इस प्रकार की संगठित श्रद्धांजलि सभा ने जनमानस में नई चेतना का संचार किया। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को जीवन में अपनाएं, तभी सच्ची श्रद्धांजलि संभव है।
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि आने वाले वर्षों में भी वे इसी भव्यता और श्रद्धा के साथ अहिल्याबाई होलकर की जयंती मनाएंगे।

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