Thursday, April 16, 2026
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होली : फागुआ गीत और ढोलक की थाप से गूंजने लगे गांव-मुहल्ले

– होली सामानों से पटे बाजार, खरीदारी को उमड़ने लगे लोग

– बच्चे, महिलाओं से लगायत बूढ़ों पर फागुन का असर

– इको फ्रेंडली गुलाल और पटाखों से सजी दुकानें

– ड्राई फ्रूट्स का दामों में उछाल

महाराजगंज (हि.स.)। जिले के सभी कस्बों में होली त्योहार को लेकर उल्लास नजर आने लगा है। होली के सामानों से दुकान गुलजार होने लगी हैं। गांवों में फगुआ गीत और ढोलक की थाप की धुन होली का सुरूर छाने लगा है। बच्चे, महिलाओं से लगायत बूढ़ों पर फागुन का असर देखा जा रहा है।

कोरोना वायरस की वजह से पिछले साल होली का त्योहार कुछ फीका रहा, लेकिन इस बार लोगों ने पहले से ही खरीदारी शुरू कर दी है। इधर, ग्राहकों की डिमांड के मुताबिक गुलाल तथा पटाखा, पिचकारी, मुखौटे और टोपियों की खेप बाहर से मंगा ली गयी है। जिले के सीमावर्ती कस्बे नौतनवा, ठूठीबारी, निचलौल और परतावल, फरेंदा, सिसवा बाजार के व्यापारी काफी सक्रिय हैं और होली के सामानों की खेप मंगाने में सबसे आगे हैं।

पटाखा व्यवसायी रवि कुमार का कहना है कि गुलाल से भरे पटाखों की कीमत उनके प्रदर्शन के मुताबिक है। चार पटाखों वाले पैकेट की कीमत 200 रुपये तक है। इससे भी महंगे पटाखे बाजार में उपलब्ध हैं। फिलहाल, ये पटाखे अथवा गुलाल इको फ्रेंडली हैं। इनके अलावा स्प्रे गुलाल, हर्बल गुलाल, रैंबो कलर स्प्रे आदि की भी अच्छी डिमांड है। बाजार में मुखौटे भी हैं। भूत-प्रेत, जानवरों के अलावा कई राजनैतिक हस्तियों के मुखौटे भी बिक रहे हैं। रंग-बिरंगी टोपियां खूब खरीदी जा रही हैं।

सूखा फलों के दाम बढ़े

होली के मौके पर सामान्य तौर सभी घरों में सूखा फलों की डिमांड रहती है। इस समय इनके दाम आसमान छू रहे हैं। जय प्रकाश सिंह कहते हैं कि हर वर्ष होली पर सूखा फल की जरूरत पड़ती है। इस वर्ष भी है। लेकिन बाजार में इनके दामों में उछाल आया है। काजू, बादाम, अखरोट, किसमिस आदि सूखा फलों के दामों में तो 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ग्राहकों को खुश करने के लिए व्यापारियों द्वारा 20 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है। बावजूद इसके गुणा गणित करने पर 10 प्रतिशत महंगा है।

आमोद

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