Wednesday, September 23, 2026
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सौर मंडल का एक नया रहस्य खुला

ओफिउचुस तारा की जटिलताओं के अध्ययन में मिले नए तथ्य

इंटरनेशनल डेस्क

वाशिंगटन। सौर मंडल के निर्माण के बारे में नया रहस्य सामने आया है। ओफिउचुस तारा की जटिलताओं के अध्ययन के दौरान यह अंदाजा लगा है कि किन परिस्थितियों में हमारे सौर मंडल का निर्माण हुआ होगा। यह नई जानकारी ओफिउचुस के नक्षत्र में सक्रिय तारों के निर्माण क्षेत्र के अध्ययन से मिली है। यह अध्ययन नेचर एस्ट्रोनामी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि हमारे सौर मंडल किस प्रकार से संक्षिप्त जीवनकाल वाले रेडियो एक्टिव तत्वों से समृद्ध हुआ। दरअसल, पिछली शताब्दी के छठे दशक में ही विज्ञानी जब उल्कापिंडों में मौजूद खनिजों का अध्ययन कर रहे थे तो उन्हें रेडियो एक्टिव तत्वों के प्रमाण मिले थे। उसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि सौर मंडल में प्राचीन अवशेष हैं और ये अल्पजीवी रेडियोन्युक्लिआइड के क्षय उत्पाद हैं। माना जाता है कि ये रेडियो एक्टिव तत्व नजदीकी तारा (सुपरनोवा) के विस्फोट से या फिर बडे़ तारों (जिन्हें वुल्फ रेयेत के भी नाम से जाना जाता है) की जोरदार हवाओं से नवजात सौर मंडल में फैले होंगे। इस नए अध्ययन में ओफिउचुस तारा के निर्माण क्षेत्र के विभिन्न तरंग दैर्घ्य का इस्तेमाल किया है। इसमें नया इंफ्रारेड डाटा भी शामिल है। इससे तारों का निर्माण करने वाली गैस के बादल और नए तारों में बने रेडियोन्युक्लिआइड्स की अंतरक्रियाओं की जानकारी मिल सके।

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अध्ययन के सह लेखक यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया, सांता क्रूज के एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के मानद प्रोफेसर डगलस एन. सी. लिन ने बताया कि संभव है कि हमारा सौर मंडल एक बड़े मालिक्युलर क्लाउड के साथ तारकीय समूह और एक या अधिक सुपरनोवा घटनाक्रम के साथ मिलकर बना हो और गैस वाला यह समूह सूर्य तथा इसके ग्रह तंत्र का निर्माण हुआ हो। उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसी परिस्थितियों के बारे में पहले भी बताया गया है, लेकिन इस अध्ययन की खासियत यह है कि विविध तरंग दैर्घ्य के अवलोकन के साथ परिष्कृत सांख्यिकीय विश्लेषण भी किया गया है ताकि माडल की संभावना का मात्रात्मक माप निर्धारित किया जा सके। फ्लैटिरोन इंस्टीट्यूट्स सेंटर फार कंप्यूटेशनल एस्ट्रोफिजिक्स के शोधकर्ता और अध्ययन के प्रथम लेखक जान फोर्ब्स ने बताया कि अंतरिक्ष आधारित गामा-रे टेलीस्कोप के जरिये अल्पजीवी रेडियोन्युक्लिआइड अल्युमीनियम-26 से निकली गामा-रे का पता लगाने में हम सक्षम हो सके। उन्होंने बताया कि ये बहुत ही चुनौतीपूर्ण अवलोकन थे। हम इसे सिर्फ दो तारा निर्माण क्षेत्र में पुख्ता तौर पर पा सके और सबसे बढ़िया डाटा ओफिउचुस कम्प्लेक्स में मिले।

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