Wednesday, April 22, 2026
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‘सूरा सो पहचानिए लरै दीन के हेत। पुरजा-पुरजा कट मरे कबहु न छाडै़ खेत।।’

चारों साहिबजादों एवं उनकी माता गुजर कौर जी के शहीदी दिवस कार्यक्रम के पहले दिन नाका गुरूद्वारा में सजा दीवान

लखनऊ( हि.स़.)। सरबंसदानी साहिब श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादों एवं उनकी माता गुजर कौर जी के शहीदी दिवस को लेकर बुधवार से दो दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो गया। पहले दिन दीवान सजाया गया। इस अवसर पर शबद-कीर्तन हुए । मुख्य कार्यक्रम गुरूवार को होगा। लंगर की तैयारियां भी शुरू हो गई है।

माता गुजरी सत्संग सभा की ओर से सरबंसदानी साहिब श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादों एवं उनकी माता,माता गुजर कौर जी का शहीदी दिवस पर लखनऊ के नाका हिन्डोला स्थित ऐतिहासिक गुरू़द्वारा श्री गुरू नानक देव जी में दीवान सजाया गया। श्री रहिरास साहिब के पाठ से दीवान का आरम्भ हुआ। तत्पश्चात हजूरी रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी ने शबद – कीर्तन किया और समूह संगत को नाम सिमरन करवाया ।

के. के. एन. एस. गुरमति संगीत एकेडमी के बच्चों ने कीर्तन ‘सूरा सो पहचानिअै लरै दीन के हेत। पुरजा-पुरजा कट मरे कबहु न छाडै़ खेत।।‘ किया। रागी जत्था भाई लाखन सिंह जी ने गुरूद्वारा मानसरोवर वालों ने ‘पहिला मरणु कबूलि जीवन को छड़ि आस। होहु समना की रेणुका तउ आउ हमारे पासि।।‘ शबद कीर्तन गायन कर साध संगत को निहाल किया। ज्ञानी सुच्चा सिंह जी पटियाला वालों ने चार साहिबजादों एवं माता गुजरी जी के शहीदी पर गुरमति विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन सतपाल सिंह मीत ने किया।

मीत ने बताया कि शहीदी दिवस का मुख्य कार्यक्रम 22 दिसंबर को होगा, जिसमें दिल्ली से पंथ के प्रसिद्ध रागी भाई चमनजीत सिंह लाल विशेष रूप से अपने जत्थे के साथ आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि लंगर की तैयारियां प्रारंभ हो गई । स्त्री सत्संग सभा की महिलाओं ने सब्जी काटने और रोटी बनाने की सेवा आरंभ कर दी है ।

दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बग्गा ने चारों साहिब जादों एवं माता गुजर कौर की शहादत को एक बड़ी शहादत कहा और अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। अरदास के उपरान्त गुरू का लंगर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

शैलेंद्र मिश्रा

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