Sunday, April 19, 2026
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 वाराणसी: रंगभरी एकादशी पर काशीपुराधिपति के साथ ढाई लाख शिवभक्तों ने खेली होली

दर्शन पूजन के लिए देर रात तक लगी रही कतार

वाराणसी(हि.स.)। रंगभरी एकादशी पर काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार देर रात तक ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में दर्शन पूजन किया। बाबा की गौना बारात दरबार में पहुंचने के पहले ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालु पहुंचने लगे।

बोल बम और हर हर महादेव के साथ अबीर गुलाल और फूलों की वर्षा करते हुए जब श्रद्धालु बाबा दरबार में पहुंचे तब पूरा परिसर शिवमय हो गया था। दिन जैसे-जैसे ढलना शुरू हुआ वैसे-वैसे बाबा के भक्त धाम में आते रहे। शाम को जब रजत पालकी पर सवार होकर भोलेनाथ धाम परिसर में पहुंचे तो उनके विग्रह की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु बेकरार दिखे। रजत पालकी पर कोई अबीर गुलाल चढ़ाकर तो कोई स्पर्श करके अपने आप को धन्य समझ रहा था। पालकी आगमन के बाद गर्भगृह में बाबा की आरती उतारी गई। आरती के पश्चात सभी दरवाजे दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए। दर्शन पूजन का सिलसिला रात 11 बजे तक चलता रहा।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि सुबह से लेकर रात्रि 11 बजे तक करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन पूजन किया। उधर, विश्वनाथ धाम में आयोजित शिवार्चनम सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी श्रद्धालु देर रात तक भजनों पर थिरकते रहे। कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति सौरव गौरव मिश्रा के कथक नृत्य से हुई। उन्होंने शिव वन्दना, आनन्द ताण्डव प्रस्तुत किया। द्वितीय प्रस्तुति डाॅ हरि प्रसाद पौडयाल की बांसुरी वादन रही, जिसमें उन्होंने परम्परागत राग बजाकर हीरी धुन बजाई। तीसरी प्रस्तुति में डाॅ सुप्रिया शाह द्वारा सितार पर राग पुरिया कल्याण और मिश्र पीलू का वादन किया गया। चौथी प्रस्तुति में कलाकार सरोज वर्मा द्वारा राग बागेश्री में शिव भजन और खेलें मसाने में होरी गाया गया। अन्तिम प्रस्तुति डाॅ विजय कपूर का भजन गायन रहा। जिसमें उन्होंने-जब भक्त नहीं होंगे भगवान कहां होंगे, बाबा काशी विश्वनाथ खेलें होली गाया। जिस पर श्रोता जमकर झूमे। इस अवसर पर नागेन्द्र पाण्डेय (अध्यक्ष काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद) निखिलेश मिश्रा अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, शम्भुशरण (एसडीएम) श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद, प्रो. विजय शंकर शुक्ल, डाॅ सुभाष चन्द्र यादव आदि उपस्थित रहे।

श्रीधर

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