Monday, April 27, 2026
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वाराणसी: बाबा विश्वनाथ मंदिर पर बनी मस्जिद नाजायज- स्वामी मुरारी दास

लखनऊ(हि.स.)। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक स्वामी मुरारी दास ने कहा कि बाबा विश्वनाथ मंदिर पर बनी मस्जिद नाजायज है। वहां के विदेशी के साथ खड़े होकर मादरे वतन के खिलाफ जाना गुनाह है।

स्वामी मुरारी दास ने हिन्दुस्थान समाचार से एक विशेष वार्ता में कहाकि ‘हक के साथ आओ, हक का अमल करो। खुदाई किताब कुरान की रोशनी में चलो। हदीश ए रसूल का संरक्षण लो। रसूल ए खुदा के सुन्नतो को अमल करो।’

स्वामी मुरारी दास ने मजहब की बात को समझाते हुए कहा कि हिन्दुस्थान में कभी भी इस्लाम की कोई हुकुमत नहीं थी। इस्लाम हुकुमत का मजहब नहीं हैं, वो इबादत, हिदमत, मोहब्बत, तालीम, तहजीब, मोहब्बत ए वतन का मजहब है। अल्लाह ने हमें इस दुनिया में एक मां की कोख और दो मादरे वतन की गोद की रहमत बरसायी है। मां की कोख में हमारी जात बनती है। इसलिए फरमाया गया है कि वतन की मोहब्बत आधा इमाम है। वतन की हिफाजत, खिदमत, तरक्की हमारा फर्ज है।

उन्होंने ज्ञानवापी पर कहा कि क्योंकि कुरान पाक यह हमें सिखाता है कि किसी नाजायज जमीन, जिस पर कत्ल कर मस्जिद खड़ी की गयी है तो नमाज कबूल नहीं करेगा। वहां नमाज हराम है। जो लोग विदेशी, आक्रमणकारियों, मुगलों, गुलामवंश वालों से हिन्दुस्थान में पैदा होकर भी रिश्ते जोड़ते हैं, वह गुनहगार है। इसलिए ज्ञानवापी मंदिर में बनी मस्जिद नाजायज है। वहां के विदेशी के साथ खड़े होकर मादरे वतन के खिलाफ जाना गुनाह है।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हिन्दुस्थान अमन, भाईचारे का नाम है। इसलिए हमारे मादरे वतन पर जिसने हमला किया, भले उसका मजहब इस्लाम क्यों न हो, वह हमारा सगा नहीं है। किसी विदेशी हुक्मरान से रिश्ता जोड़ना गुनाह है। जो हमें मजहब ने नहीं बताया, उन तमाम चीजों को हुक्मरानों ने अपने मतलब से कायम किया। हिन्दुस्थान के पीर, नवी जिन्हें देवी देवता कहते हैं, सब पूर्वज थे। इसलिए जो भी श्रीरामजन्मभूमि, श्रीकृष्णजन्मभूमि, काशी विश्वनाथ धाम के मंदिरों को ध्वस्त किया और हिन्दु भाईयों को नीचा दिखाने के लिए मस्जिद बनाने का काम किया वे सभी गुनहगार हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के देवी, देवता, महापुरुष हमारे पूर्वज है। उनका अपमान हमारा अपमान है। इसलिए फसाद खत्म करने का वक्ता आ गया है। ऐसे लोगों को हिन्दू समाज के भाईचारे के साथ रिश्ते रखते हुए काशी ज्ञानवापी से कब्जा छोड़ देना चाहिए। अभी रमजान का मुबारक महीना गया है, जिसमें हमने रोजे रखे। अल्लाह के रहमत को पाया। अल्लाह के बताये राह पर चले, गुनहगार ना बने।

शरद

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