Thursday, April 23, 2026
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राजकाज : मुश्किलों में गूगल

अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल को अपने ही देश में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अब 50 में से 36 राज्यों और कोलंबिया जिले ने बुधवार को गूगल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि सर्च इंजन का मोबाइल एप स्टोर एकाधिकार का दुरुपयोग करता है। वह सॉफ्टवेयर डेवलपरों पर आक्रामक नियम थोपता है। अक्टूबर के बाद से यह चौथा राज्य स्तरीय या संघीय अविश्वास का मुकदमा है। हालांकि एप स्टोर की जांच की मांग वाला पहला मुकदमा है। गूगल ने एक ब्लॉक पोस्ट में मुकदमे को बकवास बताया है। उसने कहा है कि आश्चर्य है कि अटॉर्नी जनरल हमारे विरोधी एपल की बजाय प्ले स्टोर पर हमलावर हैं।

श्रम की कमी
ब्रिटेन में नियोक्ता 24 साल बाद सबसे ज्यादा कामगारों की कमी से जूझ रहे हैं। भर्ती और रोजगार परिसंघ (आरईसी) ने यह दावा किया है। आरईसी ने बयान जारी कर कहा कि श्रम की कमी आर्थिक सुधारों के लिए जोखिम का अलार्म है। जून में कामगारों की संख्या 1997 के बाद सबसे तेज दर से गिर गई। लॉजिस्टिक, हॉस्पिटैलिटी और निर्माण के क्षेत्रों में कामगारों की भारी कमी हो गई है। पिछले महीनों में सफाई कर्मियों, गोदाम कर्मचारियों, किचन कर्मियों की भर्ती में परेशानी बढ़ी है।

आभूषण की खोज
जर्मनी में दुनिया का सबसे पुराना आभूषण खोजा गया है। इसे हिरण के खुर (पैरों में मौजूद नाखून) से बनाया गया है। ये 51 हजार साल पुराना है। रिसर्चर्स का दावा है कि इसका इस्तेमाल करीब 40 हजार साल पहले समाप्त हुई प्रजाति निएंडरथल करती थी। जर्मनी के हनोवर स्थित स्टेट सर्विस फॉर कल्चरल हेरिटेज की टीम का कहना है- निएंडरथल प्रजाति आज के जमाने के लोगों की तरह सुंदर दिखने का प्रयास करती थी। पुरातत्वविदों के मुताबिक, ये गहना जर्मनी के हार्ज पहाड़ों की तलहटी में मौजूद यूनिकॉर्न गुफा में मिला है। इसे वहां प्रवेश द्वार के पास एक समतल जगह पर रखा गया था। उस दौर में आभूषण को बनाने में हड्डी का इस्तेमाल होता था। खोज में मिला आभूषण आज के मुकाबले काफी बड़ा है।बेल्स पॉल्सी का खतरा
कोरोना वायरस की ताकत का असर सारी दुनिया ने देख लिया है। पिछले डेढ़ साल से यह वायरस तरह-तरह के रंग बदलकर लोगों को परेशान कर रहा है। इस वायरस के नए-नए लक्षणों को समझने के लिए नई-नई रिसर्च की जा रही हैं, ताकि इसके बदलते स्वरूप से बचाव किया जा सके। इस वायरस पर की गई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोरोना के मरीजों में चेहरे पर लकवा होने का खतरा 7 गुना अधिक होता है। मेडिकल भाषा में इसे बेल्स पॉल्सी कहा जाता है। यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल क्लीवलैंड मेडिकल सेंटर और केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च के बाद इस बीमारी का दावा किया है।

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