Friday, April 17, 2026
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मुफ्तखोरी की राजनीति बंद करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया

-बोले, मुफ्तखोरी लोगों को कामचोर और देश को बनाती है कमजोर

वाराणसी (हि.स.)। देश में मुफ्तखोरी की राजनीति बंद करने के लिए सामाजिक संस्था सुबह ए बनारस क्लब के सदस्यों ने सोमवार को मैदागिन चौराहे पर जमकर प्रदर्शन किया।

इस दौरान संस्था के मुकेश जायसवाल ने कहा कि देश-प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने के लिए जिस प्रकार से आज की राजनीति में वोटरों को लुभावने के लिए लोक-लुभावने वादे किए जा रहे हैं, आने वाले दिनों में आर्थिक दृष्टिकोण से उसके गंभीर परिणाम मिलेंगे।

अन्य वक्ताओं ने कहा कि केवल शिक्षा, न्याय और इलाज के अलावा जनता को कुछ भी मुफ्त मत दो। “मुफ्त खोरी लोगों को कामचोर और देश को कमजोर बनाती हैं”। सत्ता हथियाने के लिए राजनीतिक दल जिस तरह से लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा करते हैं, उसके कारण न सिर्फ आम आदमी को दुष्परिणाम झेलने पड़ते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी चौपट हो जाती है।

वक्ताओं ने श्रीलंका का उदाहरण देकर कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, उसके लिए काफी हद तक ऐसे ही लोक-लुभावन योजनाएं जिम्मेदार हैं, जिसके वजह से उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत के कुछ राज्य भी श्रीलंका के राह पर चल रहे हैं, वक्त रहते उन्हें ना रोका गया तो फिर भारत के वह राज्य भी श्रीलंका की तरह आर्थिक तंगी के शिकार हो जाएंगे। श्रीलंका और भारत के कुछ राज्यों की सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल,और राजस्थान पर ज्यादा कर्ज है। हमें नई रणनीति बनानी चाहिए,क्योंकि अगर इसे रोका नहीं गया तो एक दिन केंद्र पर भारी बोझ आएगा। जिसका नुकसान पूरे भारत को होगा। कुछ राज्यों में सब कुछ मुफ्त की रेवीड़यां के तहत मुफ्त बांटने की होड़ मची है, और ऐसे में उन्हें रोका नहीं गया तो ऐसे हालात हो सकते हैं, जैसे श्रीलंका के हो चुके हैं, उत्तराखंड, पंजाब, दिल्ली जैसे अन्य कई राज्यों में जिस प्रकार से बिजली फ्री, पिछला बिल माफ, महिलाओं को हर महीने पेंशन तथा नाना प्रकार के प्रलोभन देने वाले घोषणा से राजस्व की हानि हो रही है, वह आने वाले दिनों में देश के लिए आर्थिक रूप से एक गंभीर चुनौती साबित होगा। जिसका खामियाजा देश की सारी जनता को भुगतना पड़ेगा।

प्रदर्शन में अनिल केसरी, नंदकुमार टोपी वाले, प्रदीप गुप्त, चंद्र शेखर चौधरी, सुमित सर्राफ, पारसनाथ केसरी, भईया लाल यादव, डॉ. मनोज यादव, पप्पू रस्तोगी आदि शामिल रहे।

श्रीधर

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