लखनऊ (हि.स.)। समाजवादी पार्टी (सपा) ने कानपुर देहात जनपद में मां-बेटी की जलकर मौत की घटना पर प्रशासन को बेरहम बताया है। सपा ने जिले के आला अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की है। वहीं सपा नेता शिवपाल यादव ने भी ‘महिला सशक्तिकरण’ की बात को कागजी बताया है।
समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को ट्वीट कर कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने पहुंचे प्रशासन के सामने ही मां-बेटी ने आग से जलकर मौत की घटना पर अफसरों के साथ सरकार को घेरा है। कहा है कि बीेजेपी की यूपी सरकार और बेलगाम अफसरों के कारण दो मासूमों की मौतें हो गईं और कई घायल हैं। इस घटना से एक भरा पूरा परिवार उजड़ गया। इस मामले में छोटे अफसरों/कर्मचारियों के ऊपर तो मुकदमा हो गया और बड़े अफसरों को बचाया जा रहा है। मामले की लीपापोती न हो।
सपा नेता शिवपाल यादव ने ट्वीट कर कहा कि कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने पहुंचे प्रशासन के सामने ही मां-बेटी ने आग लगाकर जान दे दी और पुलिस तमाशा देखती रही। अतिक्रमण हटाने व बुलडोजर के जोश में प्रशासन आखिर अपना होश क्यों खो रहा है। क्या ‘महिला सशक्तिकरण’ व ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात केवल कागजी नीति है?
पीड़ित से मिलने जाएगा सपा दल
समाजवादी पार्टी के आलाकमान ने मामले की जांच के लिए 11 सदस्यीय दल को कानपुर देहात के रुरा जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचेतक मनोज पांडे के नेतृत्व में विधायक अभिताभ बाजपेई, विनोद चतुर्वेदी, प्रदीप यादव, मो0 हसन रुमी, पूर्व विधायक रामप्रकाश कुशवाह, कमलेश दिवाकर, प्रमोद यादव, वेद व्यास निराला, बलवान उर्फ मुन्ना व प्रवीण यादव को दल में शामिल किया गया है। यह लोग पीड़ित से मिलकर प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इस सूचना पर पुलिस ने कानपुर के आर्य नगर से विधायक अमिताभ बाजपेई को घर में नजर बंद कर लिया है। वहीं दल में शामिल सभी सपा नेताओं पर निगरानी शुरु कर दी गई है। इन सभी को घटना स्थल पर जाने से रोक लगा दी गई है। प्रशासन का मानना है कि सपा नेताओं के आने से मामला तूल पकड़ सकता है।
मोहित वर्मा
