– सांसद आवास में धूमधाम से मनाई गई वीर शिरोमणि की जयंती
चित्रकूट (हि.स.)। बांदा-चित्रकूट सांसद आर0 के0 सिंह पटेल के बलदाऊ गंज स्थित आवास पर भारत के महान वीर सपूत महाराणा प्रताप जी की जयंती बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गई। इस मौके पर सांसद ने कहा कि धर्म एवं स्वाधीनता के लिए महाराणा प्रताप का ज्योतिर्मय बलिदान भारतीय इतिहास के पृष्ठों में लिखी अमिट गाथा है। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र को वीर शिरोमणि के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
सोमवार को भगवान श्रीराम की संकल्प भूमि चित्रकूट में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर बांदा-चित्रकूट सांसद के आवास पर बडे ही हर्षोल्लाष के साथ मनाई गई। इस मौके पर सांसद आर0 के0 सिंह पटेल ने बताया कि महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था। महाराणा प्रताप मेवाड़ के 13वें राजा थे। महाराणा प्रताप को उनके साहस और पराक्रम के लिए अनंत समय तक याद किया जायेगा। अपने साहस और सूझबूझ के कारण ही उन्होंने मेवाड़ पर 35 साल तक राज किया। साथ ही मान सम्मान के लिए घास की रोटी खाई लेकिन कभी मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके। वीर शिरोमणि ने मुगल शासक अकबर को कई बार रणभूमि में कड़ी टक्कर दी। भारत के वीर सपूत महान योद्धा महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व और कृतित्व समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।
वहीं, वरिष्ठ भाजपा नेता शक्ति प्रताप सिंह तोमर ने कहा कि महाराणा प्रताप को वीरता, शिष्टता और दृढ़ता की एक मिशाल माना जाता है। वह मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले अकेले योद्धा थे। मेवाड़ की शौर्य-भूमि धन्य है जहां वीरता और दृढ़ प्रण वाले महाराणा प्रताप का जन्म हुआ। जिन्होंने इतिहास में अपना नाम अजर-अमर कर दिया।
वरिष्ठ नेता पंकज अग्रवाल ने कहा कि महाराणा प्रताप ने धर्म एवं स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान दिया। विराट व्यक्त्त्वि के धनी महाराणा ने सन् 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में करीब बीस हजार हिन्दुओं को साथ लेकर महाराणा प्रताप ने मुगल आक्रांताओं के अस्सी हजार की सेना का सामना किया।
इसके अलावा आशीष सिंह रघुवंशी ने कहा कि महाराणा प्रताप को अपने संघर्ष के जीवन में बहुत कठिन मुसीबतों का सामना करना पड़ा, किन्तु वह स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। उनका बलिदान एक वीर योद्धा की तरह हुआ। महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था। हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20हजार सैनिक थे और अकबर के पास 85हजार सैनिक। इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। महाराणा प्रताप को राजपूत वीरता, शिष्टता और दृढ़ता की एक मिशाल मानते है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील सिंह पटेल, राजकुमार त्रिपाठी, महेश्वरी सिंह, मनोज सिंह पटेल, शनि कुमार आदि दर्जनों भाजपाई मौजूद रहे।
रतन
