बलिया (हि. स.)। बसपा ने जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। यहां छठे चरण में होने वाले चुनाव में सर्वाधिक चर्चा रसड़ा से दो बार से लगातार विधायक चुने जा रहे उमाशंकर सिंह की है। देखना दिलचस्प होगा कि वे रसड़ा से अपनी जीत की हैट्रिक के साथ रसड़ा सीट को बसपा की झोली में डाल पाते हैं या नहीं।
बहुजन समाज पार्टी की ओर से जारी सूची में रसड़ा से उमाशंकर सिंह के अलावा बेल्थरारोड (सुरक्षित) से ई. प्रवीण प्रकाश, सिकन्दरपुर से संजीव कुमार वर्मा, फेफना से कमलदेव सिंह यादव, बलिया सदर से शिवदास प्रसाद उर्फ मदन वर्मा, बांसडीह से मानती राजभर और बैरिया से अंगद मिश्रा शामिल हैं। हालांकि, बसपा के लिए सबसे सेफ सीट रसड़ा मानी जा रही है। जहां से उमाशंकर सिंह लगातार तीसरी बार हाथी पर सवारी कर रहे हैं। बाकी जगहों पर नए लोगों पर बसपा ने भरोसा जताया है। ये और बात है कि कुछ जगहों पर बसपा के प्रत्याशी सपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। फेफना में सपा ने भी यादव को ही प्रत्याशी बनाया है। जबकि बसपा ने कमलदेव सिंह यादव को चुनावी मैदान में उतार कर यादव मतों में सेंधमारी का प्रयास किया है।
भगवा लहर में भी रसड़ा को बसपा की झोली में डाला था उमाशंकर ने
जिले की दूसरी नगर पालिका वाले रसड़ा के साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल दी जाती है। 2008 के पूर्व रसड़ा सुरक्षित सीट थी। सन 1985 में कांग्रेस के हरदेव तो 1989 में कांग्रेस के रामबचन ने जीत हासिल की थी। बसपा के घूरा राम 1993 में चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। 1996 में अनिल कुमार ने इस सीट को पहली बार भाजपा की झोली में डाला था। इसके बाद 2002 और 2007 में घूरा राम ने लगातार जीत दर्ज की थी। परिसीमन में सामान्य होने के बाद साल 2012 में चुनाव हुए तो बसपा के टिकट पर उमाशंकर सिंह विधायक चुने गए। वर्ष 2017 के भगवा लहर के बावजूद बसपा के उमाशंकर सिंह ने इस सीट से विजय हासिल की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के रामइकबाल सिंह (अब सपा में) को करीब 34 हजार मतों से हराया था।
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