Tuesday, May 5, 2026
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नवजात को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी मुस्कान- डॉ. अरुणेंद्र कुमार त्रिपाठी

जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान बनेगा जीवन का वरदान- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा

– छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आयेगा पास

लखीमपुर खीरी(हि.स.)। नवजात शिशु के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए मां का दूध बहुत ही जरूरी होता है। मां के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छह माह तक बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। यह जानकारी जिला महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने दी।

उन्होंने बताया कि स्तनपान बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है। आंकड़े भी बताते हैं कि छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में भी क्रमशः 11 फीसदी और 15 फीसदी तक कमी लायी जा सकती है। स्तनपान मां को स्तन कैंसर से भी बचाता है। उन्होंने बताया कि मां के दूध की महत्ता को समझते हुए स्वास्थ्य महकमे का भी पूरा ज़ोर रहता है कि लेबर रूम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स यह सुनिश्चित कराएं कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां की छाती पर रखकर स्तनपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर ही कराई जाए।

उन्होंने बताया कि नवजात को मां का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा मां को स्तनपान की पोजीशन, शिशु का स्तन से जुड़ाव और मां के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान मां के दूध से वंचित न रह जाये।

सीएमओ डॉ. अरुणेंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। बच्चे को छह माह तक लगातार केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके, मां का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पर्याप्त होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवा और कुछ नहीं है। मां के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

देवनन्दन

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