Friday, May 1, 2026
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तुरंत करें निमोनिया की पहचान, ताकि बचपन ले सके चैन की सांस

संवाददाता

बहराइच। फखरपुर ब्लॉक की रहने वाली रेशमा के बच्चे की पसली धँसने लगी थी। वह दो माह का था और उसे निमोनिया हुआ था। रेशमा बताती हैं घरेलू उपचार में गरम सरसो के तेल में अजवाइन, लहसुन डालकर शिशु की मालिश की गयी। विक्स लगाया गया और उसे गरम कपड़ों से ढका गया। लाभ न होने पर स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवा दी गयी लेकिन शिशु की सांस तेज होती गयी। गंभीर स्थिति में उसे पाँच दिनों तक जिला अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। शिशु रोग विशेषज्ञ व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगिता जैन ने बताया कि बैक्टीरिया, वायरस या धुएं के संक्रमण से निमोनिया होता है। इस दौरान फेफड़े में सूजन आ जाती है और तरल पदार्थ भर जाता है। इससे शिशु को सांस लेने में परेशानी होती है। छाती अंदर धंसने लगती है। 5 वर्ष से छोटे बच्चों को इसका सबसे अधिक खतरा रहता है। डॉ. योगिता ने स्पष्ट किया कि सामान्य सर्दी जुकाम में तेल मालिश या गर्म सिकाई से कुछ लाभ हो सकता है लेकिन यह निमोनिया का उपचार नहीं है। संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया विकराल रूप धारण कर लेता है। निमोनिया के लक्षण दिखते ही बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएं। उन्होने बताया कि दिसंबर में निमोनिया से पीड़ित 44 बच्चे भर्ती हुए थे। हालांकि अब सभी स्वस्थ हैं। जनगणना 2010-13 के अनुसार 4 वर्ष से कम आयु के 18.2 फीसद बच्चों की मृत्यु का कारण निमोनिया है जो मृत्यु के अन्य कारणों में सबसे अधिक है। डीएचईआईओ बृजेश सिंह ने बताया प्रशिक्षित आशा गृह भ्रमण के दौरान शिशुओं में निमोनिया के लक्षणों की पहचान करती हैं। लक्षण होने पर शिशु को 108/102 एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाने की सलाह देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रति मिनट सांस की गिनती 0 से 2 माह तक के बच्चे की 60 या उससे अधिक, 2 माह से 12 माह तक के बच्चे की 50 या उससे अधिक और 12 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे की सांस 40 या इससे अधिक है तो सांस तेज है और उसमें निमोनिया के लक्षण हैं। ऐसे बच्चों को जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए।

निमोनिया के लक्षण :

सांस तेज चलना, पसली का धंसना, भूख न लगना या स्तनपान न करना, कुछ भी खाने-पीने पर उल्टी कर देना, नथुनों का फूलना, दौरे पड़ना, सुस्त या बेहोश हो जाना।

क्या करें :

बच्चे को पीसीवी का टीका लगवाएं। जन्म के 48 घंटे से पहले शिशु को न नहलाएं। खुद व बच्चे के हाथ बार-बार धोते रहें। शिशु के आस-पास या सौरी में धुएं न फैलने दें। खांसी लगातार आ रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें। शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान कराएं। नवजात शिशु के पैर और सिर को ढक कर रखें।

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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
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