हरदोई(हि.स.)। भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि तत्कालीन डीपीआरओ ने डस्टबिन आपूर्ति के नाम पर प्रधानों, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों पर दबाव डलवा कर चहेती फर्म के पक्ष में चेककटवाई थी।
श्री अग्रवाल ने कहा कि उनसे यदि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों से सघन पूछताछ व जांच पड़ताल हो तो घोटाले का सच सामने आ सकता है। एसआईटी को चाहिए कि वह इस घोटाले में शामिल बड़ी मछलियों के चेहरे बेनकाब करें।
जनपद के टडियावां, बावन, सुरसा व भरावन ब्लॉकों में डस्टबिन आपूर्ति में हुई बड़ी धांधली पर भाजपा के पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि आपूर्ति में बड़ी मछली के नाम व चेहरे सामने लाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि डस्टबिन आपूर्ति कांड में तत्कालीन डीपीआरओ मुख्य रूप से दोषी हैं। क्योंकि शासन स्तर पर उच्च पद पर बैठे अपने राजनीतिक आकाओं के दबाव में उन्होंने तत्कालीन ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों पर दबाव डाल कर डस्टबिन आपूर्ति की चेक कटवाई थी।
हरदोई में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार यदि चाहेगी तो प्रधान सरकारी गवाह बनने को तैयार है। उन्होंने कहा कियदि उक्त घोटाले की जांच पड़ताल की जाए उसे बड़ी-बड़ी मछलियों के नाम व चेहरे सामने आ सकते हैं।
आपको बताते चलें कि हरदोई में मुख्य रूप से चार ब्लॉकों सुरसा, बावन, टडियावा व भरावन मेंडस्टबिन खरीद घोटाले में कुल 183 पर रिपोर्ट दर्ज हुई हैं जिनमें, 141 ग्राम प्रधान व 41 ग्राम विकास सचिवों को नामजद किया गया है। सप्लाई करने वाले कंपनी के निदेशक भी दोषी है इस पूरे खरीद-फरोख्त में स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ाई गई थी।
लखनऊ में बैठे उच्च स्तरीय अपने राजनीतिक आका के दबाव में तत्कालीन डीपीआरओ ने बिना किसी अनुमति के मौखिक रूप से डस्टबिन की खरीददारी, बाजार मूल्य से बहुत ज्यादा कीमतों पर दर्शा कर संबंधित ग्राम प्रधानों ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों से चेक संबंधित संस्था के पक्ष में कटवा कर भुगतान करा दिया था।
पूरे मामले की जांच कर रही थी विजिलेंस, जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया है। डस्टबिन घोटाले की चर्चा करते हुए तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।
अम्बरीष
