Sunday, April 19, 2026
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जयंती पर याद किये गये प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ सम्पूर्णानन्द

जयंती पर सार्वजनिक अवकाश और पैतृक आवास को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की उठी मांग

वाराणसी (हि.स.)। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा० सम्पूर्णानन्द की 132वीं जयंती रविवार को मनाई गई। तेलियाबाग पार्क में स्थित डॉ सम्पूर्णानन्द की मूर्ति पर माल्यार्पण कर लोगों ने उनके विशाल व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के बैनर तले जुटे समाज के लोगों ने कहा कि बनारस का नाम परिवर्तन कर वाराणसी करना तथा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने बनारस का गौरव बढ़ाया। वे जाति-धर्म, भेद-भाव से कहीं ऊपर सोच रखते थे। प्रखर शास्त्री होने के साथ-साथ समाजवाद के सच्चे प्रणेता थे।

महासभा के प्रदेश अध्यक्ष उदय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि डा० सम्पूर्णानन्द राजनैतिक, सांस्कृतिक, असाधारण व्यक्तित्व के धनी, मनीषी, मानवीय मूल्यों की परम्परा के चिंतक थे। इस अवसर पर देश में खुशहाली, तरक्की, अमन-चैन, भाईचारा, सुख-समृद्धि व देश में बढ़ रहे आतंकवाद, महंगाई, भ्रष्टाचार, मिलावट, जमाखोरी व अराजकता के खात्मा के लिए यज्ञ भी किया गया। समाज के लोगों ने यज्ञ में भाग लेने के बाद डा० सम्पूर्णानन्द की जयन्ती पर 01 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश व उनके पैतृक आवास जालपा देवी रोड को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग भी की।

जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबा के निधन पर शोक जताकर श्रद्धांजलि भी दी गई। कार्यक्रम में सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा बतौर मुख्य अतिथि, कायस्थ विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता श्रीवास्तव,व्यापार मण्डल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, तिलक राज कपूर (राष्ट्रपति पदक प्राप्त), गंगा सहाय पाण्डेय, डा० श्रद्धानन्द काशी विद्यापीठ, रतन चन्द्र वर्मा (एडवोकेट), विशाल श्रीवास्तव, अनुराग पाण्डेय, डा० रश्मि चित्रांशी, उषा सिंह चौहान, मधु श्रीवास्तव, डा० सिद्धनाथ शर्मा आदि ने भी भागीदारी की।

श्रीधर

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