Thursday, April 23, 2026
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गोंडा : दो राजघराने हुए एक, भाजपा विधायक ने घर पहुंचे सपा प्रत्याशी को समर्थन देने का किया ऐलान

सपा के पूर्व मंत्री ने भाजपा पर कठपुतली प्रत्याशी उतारने का लगाया आरोप

गोंडा (हि.स.) बीते 36 वर्षों से दो राजघराने एक दूसरे के राजनैतिक धुर विरोधी रहे। लेकिन भाजपा से टिकट कटने के बाद सोमवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री व वर्तमान में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह भाजपा विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के आवास पर मिलने पहुंचे। भाजपा विधायक के पुत्र कुंवर शारदे मोहन सिंह ने प्रेस वार्ता कर उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया है।

भाजपा विधायक के पुत्र कुंवर शारदे मोहन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी पर छह बार से विधायक उनके पिता लल्ला भैया के समर्पण व वफादारी के बावजूद परिवार की उपेक्षा व अनदेखी का आरोप लगाते हुए सपा के कर्नलगंज से घोषित प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। श्री सिंह ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि उनके पिता संग वे स्वयं पांच हजार भाजपा कार्यकर्ताओं संग पार्टी से इस्तीफा देंगे।

उन्होंने कहा कि कर्नलगंज का मान रखने के लिए बरगदी कोट और भम्भुआ कोट एक साथ खड़े रहेंगे। एक दूसरे का राजनीतिक सहयोग भी करेंगे।

लल्ला भैया बरगदी कोट व योगेश प्रताप सिंह भंभुआ कोट के कुंवर हैं। दोनों राजघराने सदैव प्रत्येक चुनाव में एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं,लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लल्ला भैया का टिकट काटकर परसपुर के ब्लाॅक प्रमुख अजय कुमार सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। जिससे नाराज होकर भाजपा के मौजूदा विधायक ने पार्टी से बगावत बुलंद कर सपा प्रत्याशी का समर्थन कर दिया। हालांकि अभी तक बीजेपी विधायक ने त्याग पत्र हाईकमान को नहीं सौंपा है। अभी तक पार्टी की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है। फिलहाल यह माना जा रहा है कि यदि दोनों राजघराने चुनाव में दायें बायें कदम की तरह चलते रहे तो इस सीट पर भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया 1989,1991,1993,1996,2007 व 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़कर छह बार विधानसभा पहुंचे हैं। सपा के पूर्व मंत्री योगेश प्रताप ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा पर कठपुतली पर नाचने वाला प्रत्याशी उतारने का आरोप मढ़ते हुए कहा कि अगर समर्पित नेता व कार्यकर्ता का सम्मान कहीं है तो केवल समाजवादी पार्टी में है।पूरे घटनाक्रम से क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं।

महेन्द्र

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