– घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा
कानपुर देहात (हि.स.)। अतिक्रमण हटाने के दौरान जिंदा जली मां-बेटी के शवों को परिजन उठाने नहीं दे रहे हैं। उनकी मांग है कि जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां नहीं आएंगे तब तक शवों को नहीं उठाया जाएगा। जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी पीड़ित परिवार को मनाने में जुटे हैं।
कानपुर देहात के मैथा तहसील इलाके में आने वाले मंडौली गांव में सोमवार को उप जिलाधिकारी मैथा एक अवैध कब्जे को हटाने गए थे। प्रशासन का कहना था कि कृष्ण गोपाल नाम के एक व्यक्ति ने ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा करके परिवार के साथ यहां रहा था। उसे ही हटाया जा रहा था, लेकिन परिवार वाले हटने को राजी नहीं थे।
जिस घर को गिराया जा रहा था वो लोग मौके पर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने खुद को आग लगाने की धमकी भी दी थी। जेसीबी से घर को गिराने के दौरान छप्पर में आग लग गई। उसकी चपेट में आकर कृष्ण गोपाल की पत्नी प्रमिला और बेटी नेहा की जलकर मौत हो गई। घटना को देख ग्रामीणों ने वहां पर खड़ी प्रशासनिक टीम को मौके से खदेड़ दिया। कुछ देर बाद आलाधिकारियों का जमावड़ा लगने लगा और सभी अपने-अपने तरीके से पीड़ित परिवार को समझाने लगे।
पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर एसडीएम सहित 39 लोगों पर हत्या जैसी गंभीर धाराओं पर मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, घटना की पूरी रात गुजरने के बाद अगले दिन मंगलवार दोपहर तक परिजन पोस्टमार्टम के लिए शव को उठने नहीं दे रहे हैं। परिजनों की मांग है कि मौके पर मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री स्वयं यहां दोषियों पर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाये तभी आगे कुछ बात बनेगी।
घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा
कानपुर देहात में हुई इस घटना को लेकर विपक्षी दल ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और शिवपाल यादव ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, समाजवादी पार्टी का एक डेलिगेशन पीड़ित परिवार से मिलने जा सकता है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उनकी सरकार किसी को बचाएगी नहीं जो भी दोषी होगा उन पर सख्त कार्यवाही होगी।
अवनीश
