Monday, April 27, 2026
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एक-एक करके तरकश के सारे तीर चलाये, पर कुमार विश्वास तालियां नही बटोर पाये

बांदा (हि.स.)। रविवार की रात बांदा के जीआईसी ग्राउंड में महान कवि और पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी की याद में अटल काव्यांजलि का आयोजन किया। 

मंच और उसके आस पास भाजपाइयों की भीड़ को देख कर प्रसिद्ध कुमार विश्वास काफी आसमंजस में नजर आए उन्होंने अपने अंदाज में भीड़ में गैर भजापाइयों को तलाशने की कोशिश की ताकि भाजपा पर कटाक्ष करने पर उन्हें तालियां मिल सकें। कुमार ने अपने विशेष अंदाज में सबसे पहले बाँदा की ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर कटाक्ष किया। इसके बाद वह लगातार बीजेपी के नेताओं पर कटाक्ष करते रहे। वैसे कुमार ने बैलेंस बनाये रखने के लिए कांग्रेस, और केजरीवाल की आप पार्टी को भी नहीं छोड़ा कार्यक्रम की शुरुआत देश की प्रसिद्ध कवित्री कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना से की ।इसके बाद कवि गजेंद्र प्रयांशु ने देश के दुश्मनों को संदेश देते हुए गीत पढा- 
दिल मे तेरे प्यार की दुनियां दफन है ।
भोर लगती दोपहर जैसी तपन है ।
मैं इधर शादी का जोड़ा बन रहा हूँ ।
तू उन्ही धागों से क्यों बुनता कफन है ।
इसके अलावा गजेंद्र प्रयांशु ने कई कविताएं सुनाईं। कवि अनिल चौबे ने लोगों को खूब हंसाया और गुदगुदाया उन्होंने पढ़ा- 
जैसे तैसे मेरी बीत गई है जवानी ।
आशाराम सा बुढापा न बिताना चाहता हूं मैं।
और मेरी अंतिम इच्छा है बस एक बार ।
राधे माँ को गोद में उठाना चाहता हूं मैं ।

अनिल चैबे की इन पंक्तियों ने लोगों को खूब हंसाया । कवि रमेश मुस्कान ने भी लोगों को खूब हंसाया उन्होंने आजकल की आशिकी पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा- 
अंखियाँ लड़ गईं एक पल्ले पड़ गई ।
बात बढ़ गई दिमाग पे चढ़ गई ।
मेरी जिंदगी में एक कहानी और बढ़ गई।
इजहार किया तो तीनचार जड़ गई ।
महीनों की आशिकी मिनटों में झड़ गई ।

रमेश मकान के बाद देश की प्रसिद्ध कवित्री कविता तिवारी ने देश प्रेम और महिलाओं की अहमियत पर कई कविताएं पढ़ी बेटियों पर उनकी कविता बहुत सराही गई उन्होंने पढ़ा-

इस लिए आइए हमारे साथ आइए ।
जिंदगी को अपनी न दांव पे लगाइए ।
शपथ तुरंत आज सब लोग उठाइये ।
देश को बचाना है तो बेटियां बचाइए ।
कविता तिवारी की रचनाओं और उनके अंदाज ने लोगों को बाँधे रखा।अंत में कुमार विश्वास जो कार्यक्रम का संचालन भी कर रहे थे, ने जब कविता पाठ करना शुरू किया तो लोगों में काफी जोश नजर आया, लेकिन कुमार ने पहले अपनी पुरानी रचनाओं को पढ़ा -किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी है। 
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ।मैँ अपने गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूँ ।

इन पुरानी कविताओं को सुन कर लोगों में उतना उत्साह नहीं आया जितना कुमार के कार्यक्रम में देखने को मिलता है। इसके बाद कुमार ने बीच बीच मे मोदीजी योगीजी पर कटाक्ष के साथ साथ राजनीति पर पढ़ा-
स्वयं से दूर हो तुम भी स्वंय दूर हैं हम भी ।
बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर हैं हम भी ।
बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर हैं हम भी ।
अतः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर हैं हम भी ।

कुमार विश्वास इस बार बाँदा के इस कार्यक्रम में उतने जोश में नजर नहीं आये जितना जोश उनमें देखा जाता है। पंडाल में मौजूद लोगों को जोड़ने लिए कुमार ने अपनी कई रंग की कविताएं सुनाईं, प्रेम रस के बाद राजनीति देश भक्ति, शहीदों की कुर्बानियों पर भी कुमार ने गीत पढ़े लेकिन कुमार को लोगों से जितनी उम्मीद थी,उतना लोग नहीं जुड़ पाए । अंत में कुमार ने इंडिया पाकिस्तान की कई पुरानी घटनाओं पर कटाक्ष करके लोगों को जोड़ने का प्रयास किया । पूरे कार्यक्रम में कुमार इस बार असमंजस में दिखे, श्रोताओं से वह उतना नहीं जुड़ पाए जितना हमेशा जुड़ते हैं ।

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