पार्टी महासचिव ने कहा-आरएलडी में बगावत की वजह मुसलमानों से विश्वासघात
प्रादेशिक डेस्क
लखनऊ। केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को वक्फ विधेयक पर समर्थन देने के कारण भाजपा की उत्तर प्रदेश में प्रमुख सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल अर्थात आरएलडी में बगावत शुरू हो गई है। विधेयक के पास होने के बाद जहां कल जेडीयू में घमासान देखने को मिला, तो वहीं आज राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) में भी मुस्लिम नेताओं में नाराजगी दिखाई दी। रालोद के प्रदेश महासचिव मुजफ्फर नगर निवासी शाहजेब रिजवी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा हापुड़ जिला प्रमुख महासचिव मोहम्मद जकी ने भी इस्तीफा दे दिया है।
जयंत चौधरी पर भारी आरोप
आरएलडी में बगावत की शुरुआत उस समय हुई, जब पश्चिमी उत्त्र प्रदेश में आरएलडी नेताओं द्वारा बगावत के सुर बुलंद किए जाने लगे। आरएलडी के प्रदेश महासचिव शाहजेब रिजवी ने वीडियो के माध्यम से पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया और पार्टी प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर कटु आरोप लगाए। रिजवी का कहना है कि जयंत चौधरी ने मुसलमानों से भरपूर वोट लेने के बाद वक्फ बिल पर सहमति जताकर अपने समर्थकों के विश्वास का भयानक उल्लंघन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमानों ने जिस ‘आरएलडी’ पर अपना भरोसा जताया था, उसे आज आपने धोखा दिया।
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वक्फ बिल का विरोध
शाहजेब रिजवी ने अपने वीडियो में बताया कि उन्होंने आरएलडी पार्टी में आए बदलाव को साफ़ तौर पर देखा है। वे कहते हैं कि जयंत चौधरी ने पार्टी के उस मूल सिद्धांत से परहेज किया, जिसने पहले मुसलमानों को मुख्य धारा में लाकर उनके लिए पर्याप्त वोट सुनिश्चित किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जयंत चौधरी अब वक्फ बिल के पक्ष में होकर मुसलमान समुदाय के हितों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हापुड़ के जिला महासचिव मोहम्मद जकी ने भी इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने वादों का पालन करने की बजाय सत्ता के मोह में अपने आदर्शों को खो दिया है। मुजफ्फर नगर से रालोद के युवा विधानसभा अध्यक्ष वाजिद अली ने भी इसी कारण पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय राजनीति में एक गहरा आक्रामक प्रभाव डाला है। मौजूदा बदलावों के चलते, मुसलमान समुदाय में भारी असंतोष और निराशा देखी जा रही है। पार्टी के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या जयंत चौधरी ने अपने चुनावी वादों और वादा किए गए सेक्युलर सिद्धांतों का पालन किया था या नहीं। इस विश्वासघात ने मुसलमान समुदाय के बीच गहरी खटास और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
आरएलडी में उथल-पुथल का दिखेगा असर
आरएलडी में मचे इस घमासान का पश्चिमी यूपी की राजनीति में व्यापक उथल-पुथल देखने को मिलेगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी 2027 के चुनावों में इस पार्टी के खिलाफ मतभेद और असंतोष स्पष्ट रूप से सामने आएंगे। शाहजेब रिजवी ने चेतावनी दी है कि चुनाव का समय आने पर उन नेताओं की आलोचना की जाएगी जिन्होंने मुसलमानों के साथ धोखा किया और उनकी उम्मीदों को ठेस पहुँचाई। इस संघर्ष की जड़ में न केवल पार्टी के भीतर के मतभेद हैं, बल्कि यह सवाल भी उठता है कि क्या पार्टी ने अपने सामाजिक और धार्मिक सिद्धांतों का पालन किया है। मुसलमान समुदाय ने जिस नेता पर भरोसा किया था, अब उस पर से नाराजगी और असंतोष साफ़ नजर आ रहा है। अगर यह स्थिति स्थायी हुई तो पार्टी की राजनीतिक मजबूती पर गंभीर प्रश्न उठ सकते हैं।
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भड़काऊ भाषण देने में गिरफ्तार हो चुके हैं शाहजेब
शाहजेब रिजवी का यह इस्तीफा उनके अतीत की विवादास्पद घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है। मेरठ के फलौदा थाने के अंतर्गत रसूलपुर गांव के निवासी शाहजेब रिजवी पहले समाजवादी पार्टी में सक्रिय रहे। अगस्त 2020 में, उन्होंने एक भड़काऊ वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने कर्नाटक कांग्रेस के विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के सिर पर 51 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। यह इनाम उस स्थिति में दिया जाने वाला था जब कोई व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के लिए नवीन का सिर काटकर लाएगा। इस वीडियो के कारण सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाएँ और विवाद छिड़ गए। नवीन द्वारा फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के अपमानजनक पोस्ट ने 11 अगस्त 2020 को बेंगलुरु में दंगे भड़काए, जिनमें पुलिस की गोलीबारी के दौरान तीन हमलावरों की मौत हो गई थी। मेरठ के एसएसपी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की जांच के आदेश दिए और 24 घंटे के अंदर शाहजेब रिजवी को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना ने उनके राजनीतिक करियर पर गहरा प्रभाव डाला और अब यह अतीत की घटनाएँ भी पार्टी में चल रही बगावत की घटनाओं से जुड़ जाती हैं।
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