Wednesday, September 23, 2026
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आईआईटी कानपुर के प्रो. अरुण शुक्ला को मिलेगा शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार

पिछले वर्ष प्रोफेसर बुसरा अतीक को कैंसर के शोध पर मिला था पुरस्कार

प्रो. शुक्ला शरीर पर दवाओं के दुष्प्रभाव पर कर रहे हैं शोध

कानपुर (हि.स.)। नई तकनीक और शोध में वैश्विक पटल पर पहचान बना चुकी कानपुर आईआईटी के नाम लगातार दूसरी बार शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार के रुप में बड़ी उपलब्धि हाथ लगी है। यहां के बायोलाजिकल साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत प्रो. अरुण कुमार शुक्ला को इस वर्ष शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इन्होंने दवाओं के शरीर में होने वाले साइड इफेक्ट को कम करने पर शोध किया है। हालांकि इसी विभाग में कार्यरत प्रो. बुसरा अतीक को पिछले वर्ष कैंसर के शोध पर यह पुरस्कार मिल चुका है, लेकिन दावा है कि प्रो. शुक्ला यह पुरस्कार पाने वाले सबसे युवा प्रोफेसर हैं। घोषणा के साथ ही देश-विदेश से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं।

आईआईटी के बॉयो साइंस एंड बॉयो इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत 39 वर्षीय प्रोफसर अरुण शुक्ला को भारतीय औद्योगिकी तथा अनुसंधान संस्थान की ओर से विज्ञान और प्रौद्योगिकी 2021 के लिए प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के लिए चुना गया है। डॉ. अरुण को जैविक विज्ञान वर्ग में पुरस्कार दिया गया है। फरवरी में विज्ञान दिवस के अवसर पर पुरस्कार दिया जाएगा। इन्होंने दवाओं के शरीर में होने वाले साइड इफेक्ट को कम करने पर शोध किया है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि साइड इफेक्ट को कम करने के लिए जी प्रोटीन कपल रिसेप्टर (जीपीसीआर) के जरिये शरीर में बीमारी की जरूरत के हिसाब से दवा बनाने पर शोध किया है।

दवाइयों के साइड इफेक्ट पर किया शोध

प्रो. शुक्ला ने बताया कि दवाएं शरीर की समस्या को कम करने के साथ साथ नुकसान भी पहुंचाती है। इनको कम करने के लिए जी प्रोटीन कपल रिसेप्टर (जीपीसीआर) के जरिए शरीर में बीमारी की जरुरत के हिसाब से दवा बनाने पर शोध किया है। बताया कि हमारा प्रयास है कि देश में ऐसी दवाएं बने जो बीमारियों को तो दूर करें लेकिन कोई साइड इफेक्ट न करें। बताया कि जीपीसीआर पर काम इसलिए किया क्योंकि यह शरीर की कोशिकाओं को मेंबरेन से बंद रखता है। शरीर की जरुरतों को इसके जरिए जल्दी समझा जा सकता है। आईआईटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने ट्वीट करके उन्हें बधाई दी है।

जर्मनी से किया पीएचडी

प्रो. अरुण कुमार शुक्ला मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के रहने वाले हैं। आईआईटी कानपुर में वह 2014 से कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने बीएससी गोरखपुर यूनिवर्सिटी, एमएससी जेएनयू और पीएचडी जर्मनी की फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी से किया। कुछ समय तक अमेरिका में शोध कार्य किया। अब तक उनके कई शोध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। अभी टारगेटेड मेडिसिन पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें कुछ हद तक सफलता मिल चुकी है। यह दवा केवल रोग या समस्या पर ही असर करेगी। बाकी के शरीर के हिस्से पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे।

सर शांति स्वरुप की याद में दिया जाता है पुरस्कार

यह पुरस्कार वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के संस्थापक निदेशक सर शांति स्वरूप भटनागर के सम्मान में दिया जाता है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा यह पुरस्कार वार्षिक रूप से उल्लेखनीय एवं असाधारण अनुसंधान, अपलाइड या मूलभूत श्रेणी के जीववैज्ञानिक, रासायनिक, पार्थिव, पर्यावरणीय, सागरीय एवं ग्रहीय, अभियांत्रिक, गणितीय, चिकित्सा एवं भौतिक विज्ञान के क्षेत्रों में शोध के लिए दिए जाते हैं। इस पुरस्कार का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं असाधारण योगदान देने वाले भारतीय प्रतिभाओं को सम्मानित करना है।

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