सुरक्षा घेरों में घिरी आस्था की राह, 8 जुलाई तक चलेगी जगन्नाथ रथ यात्रा
राज्य डेस्क
पुरी (ओडिशा)। पुरी में आस्था का सबसे बड़ा उत्सव जगन्नाथ रथ यात्रा आज से भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गया। तीनों रथों भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’, देवी सुभद्रा के ‘देवदलन’ और भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ को भक्तों की भीड़ के बीच मंदिर के मुख्य द्वार से ग्रैंड रोड की ओर खींचा गया। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें माना जाता है कि भगवान साल में एक बार अपने भाई और बहन के साथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं।
इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक चलेगी। यात्रा के पहले दिन सुबह से ही पुरी की गलियों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं, जिसमें ड्रोन कैमरे, AI-आधारित CCTV सिस्टम, एकीकृत कमांड सेंटर और सशस्त्र बलों की तैनाती शामिल है।
नबाजौबन दर्शन के बाद निकली रथ यात्रा
11 जून को भगवान के स्नान अनुष्ठान के बाद से सार्वजनिक दर्शन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 26 जून को भक्तों को नबाजौबन दर्शन का अवसर मिला, जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के कायाकल्प का पर्व होता है। इसे ‘नेत्र उत्सव’ भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन प्रतिमाओं की आंखें पुनः रंगी जाती हैं।
भक्तों ने मंदिर के सिंह द्वार पर रत्न बेदी से दर्शन किए, जिससे आस्था का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रथों को विधिवत पूजा के बाद मंदिर प्रांगण के बाहर सजाया गया। जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए तीनों रथों का निर्माण महीनों पहले ही शुरू हो गया था, और अब वे पूरी तरह सुसज्जित हैं।
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प्रशासन ने संभाली कमान, नियंत्रण कक्ष से निगरानी
ADG ट्रैफिक दयाल गंगवार के अनुसार इस वर्ष की जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान एक एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की गई है, जहां ट्रैफिक और पार्किंग की पूरी निगरानी हो रही है। उन्होंने बताया कि पूरी व्यवस्था को AI आधारित बनाया गया है और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।
पुरी शहर को 12 जोन में बांटकर प्रत्येक जोन में नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। सिविल पुलिस, यातायात पुलिस, दमकल और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इस वॉर रूम में 24 घंटे तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने पार्किंग, पेयजल, शौचालय और मेडिकल सुविधा की भी विशेष व्यवस्था की है।
पवित्र रस्मों के साथ शुरू हुई रथ खींचने की परंपरा
एसजेटीए के प्रमुख प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि नबाजौबन दर्शन की रस्म के बाद सभी धार्मिक रस्मों का पालन करते हुए रथ यात्रा की शुरुआत कर दी गई है। दोपहर में तीनों रथों को मंदिर से खींचकर मुख्य मार्ग पर लाया गया। लाखों की भीड़ ‘हरि बोल’ और ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष के साथ रथों को खींचने में लगी रही। रथों को खींचने का विशेष अवसर पुरी ही नहीं, देशभर के भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान पुरी में धर्म, संस्कृति और पर्यटन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
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खतरे की घड़ी में भी विश्वास कायम
जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान आतंकी खतरे या भीड़ नियंत्रण की चुनौतियों को देखते हुए इस बार अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित बल की चार यूनिट, एनडीआरएफ और बम निरोधक दस्ते भी तैनात किए गए हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सहायता केंद्र बनाए गए हैं। कुल मिलाकर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा ‘जीरो टॉलरेंस फॉर डिस्टरबेंस’ के सिद्धांत पर चलाई जाएगी।
जगन्नाथ रथ यात्रा: संस्कृति, श्रद्धा और टेक्नोलॉजी का त्रिवेणी संगम
जगन्नाथ रथ यात्रा आज केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और टेक्नोलॉजिकल प्रयोगशाला भी बन गया है। जहां एक ओर पुरातन परंपराएं जीवंत हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान उनका सहयोगी बनकर सेवा में उपस्थित है। यही कारण है कि यह यात्रा केवल एक राज्य या देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
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